यूपी

मथुरा: पर्यटकों को नहीं मिल पा रही है बुनियादी सुविधाएं, ठहरने के लिए नहीं है उचित व्यवस्था

mathura मथुरा: पर्यटकों को नहीं मिल पा रही है बुनियादी सुविधाएं, ठहरने के लिए नहीं है उचित व्यवस्था

मथुरा। पर्यटन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण मथुरा जिले में यूं तो केंद्र और राज्य सरकार द्वारा करोड़ों अरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन अगर पर्यटकों की सुविधाओं की बात करें तो मथुरा वृंदावन में सब कुछ नगण्य है। अच्छी खासी रकम खर्च करने के बाद भी पर्यटको के ठहरने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है । एक ओर तो सरकार पर्यटकों को और अधिक सुविधाएं देने की बात कर रही है ,वहीं दूसरी ओर पर्यटन विभाग ने यात्री आवास गृहों को ही औने पौने दामों में लीज पर बेच डाला।

mathura मथुरा: पर्यटकों को नहीं मिल पा रही है बुनियादी सुविधाएं, ठहरने के लिए नहीं है उचित व्यवस्था

पर्यटन विभाग के अनुसार उनके पास अब केवल 18 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है जबकि अकेले मथुरा वृंदावन में ही प्रति दिन हजारों लोग देश विदेश से आते हैं। लीज पर दी गई सरकारी जमीनों के बाजारू कीमत की अगर बात करें तो करीब 50 करोड़ से भी अधिक है । मथुरा के साथ साथ 6 अन्य जिलों में भी जमीन को लीज पर दिया गया है, इस सौदे पर सवाल इसलिए भी सवाल उठ रहे है की चुनाव अचार सहित लगने से ठीक एक दिन पहले ही इन जमीनों को क्यों दिया गया?

ब्रजभूमि में प्रति वर्ष तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु घूमने आते है इस दौरान तीन से सात दिन तक वो मथुरा वृन्दावन गोवर्धन बरसाना नंदगाँव गोकुल में ठहरते भी है । औसतन 1 दिन मथुरा वृंदावन में हजारों की संख्या में तीर्थयात्री ठहरते हैं और अगर हम बात करें सरकारी यात्री आवास ग्रहों की , तो आप मथुरा जिले की स्थिति सुन कर चौंक जाएंगे। जी हाँ , हम बताते हैं मथुरा में पर्यटन विभाग द्वारा यात्रियों को दी जाने वाली सुख-सुविधाओं की हकीकत। मथुरा जिले में मात्र 3 यात्री अतिथि सेवा केंद्र के केंद्र थे , लेकिन फिलहाल चालू स्थिति के दो अच्छे खासे यात्री आवास केंद्रों को पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने निजी कंपनियों से साठगांठ कार औने-पौने दामों में 30 वर्ष के लिए लीज पर दे दिया। यह दोनों यात्री आवास गृह प्राइम लोकेशन पर स्थित है।

इन दोनों अतिथि ग्रहों से देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को जायज दर पर आवास की सुविधा मिल जाती थी लेकिन पर्यटन विभाग के अधिकारियों को यात्रियों को मिल रहा है, यह लाभ मंजूर नहीं था इसी के चलते उन्होंने इन दोनों इकाइयों को घाटे में दर्शाकर विभागीय अधिकारियों को गुमराह कर दिया और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से ठीक 1 दिन पहले उत्तर प्रदेश की अन्य 6 इकाइयों के साथ मथुरा वृंदावन के दोनों अतिथि गृहो को भी नीलाम करा दिया अब आप भला खुद ही सोचिए कि पर्यटन विभाग के अधिकारियों के इस कृत्य से उत्तर प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की फायदा मिलेगा या नुकसान ? देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु मथुरा वृंदावन में कितना सुकून महसूस करेंगे ? क्या पर्यटन विभाग के इस कृत्य से उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा ? यह बहुत बड़ा सवाल है । इसको लेकर जब मथुरा के जिला पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव से बात की तो उनका कहना था कि मथुरा की दोनों इकाइयां घाटे में चल रही थी इसी के चलते इन्हें 30 वर्ष के लिए पट्टे पर दे दिया गया है जब उनसे पूछा कि अब मथुरा आने वाले तीर्थयात्री कहां ठहरेंगे और पर्यटन विभाग के पास कितने यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है तो उन्होंने बड़ी ही निर्लज्जता से कहा कि 9 कमरे हैं और उनमें 18 लोग अधिकतम ठहर सकते हैं।

 -योगेश भरद्वाज, संवाददाता मथुरा

 

Related posts

व्‍यापार मंडल की मांग, टाले जाएं पंचायत चुनाव, लगाया जाए लॉकडाऊन

sushil kumar

बीजेपी दो तिहाई बहुमत से प्रदेश में सरकार बनाएगीः साक्षी महराज

Rahul srivastava

समाजवादी लोहिया वाहिनी के पदाधिकारियों का इस्तीफा

Rahul srivastava