October 17, 2021 10:57 am
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राजनाथ ने पाकिस्तान से कहा, ‘आतंकवादियों का महिमामंडन न करें’

rajnath Singh राजनाथ ने पाकिस्तान से कहा, 'आतंकवादियों का महिमामंडन न करें'

इस्लामाबाद। पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां गुरुवार को इस्लामाबाद से आतंकवादियों का ‘शहीदों’ की तरह महिमामंडन नहीं करने को कहा, वहीं पड़ोसी मुल्क ने जम्मू एवं कश्मीर में नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए इसकी निंदा की। दक्षेस के गृह मंत्रियों की बैठक के दौरान राजनाथ सिंह व उनके पाकिस्तानी समकक्ष निसार अली खान के बीच तनातनी रही। लेकिन दोनों ने एक दूसरे के मुल्क का नाम लेने से गुरेज किया।

Rajnath Singh

राजनाथ ने कहा, “आतंकवाद का महिमामंडन न हो और इसे किसी भी राष्ट्र द्वारा संरक्षण न मिले, यह सुनिश्चित करने की जरूरत है। किसी देश का आतंकवादी किसी अन्य राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता सेनानी या शहीद नहीं हो सकता।”

उन्होंने कहा, “जो आतंकवाद या आतंकवादियों का समर्थन करते हैं, सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराते हैं या किसी भी प्रकार की सहायता करते हैं, उन्हें अलग-थलग करना चाहिए। इस बुराई के खात्मे के लिए हमें अपने संकल्पों को मजबूत करना चाहिए, इसे खत्म करने के लिए गंभीर उपाय करने चाहिए।”

अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी आलोचनाओं के निशाने पर निश्चित तौर पर पाकिस्तान सरकार थी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में मारे गए हिजबुल आतंकी बुरहान वानी को ‘शहीद’ करार दिया था। उन्होंने कहा था कि वह जम्मू एवं कश्मीर की ‘आजादी’ के लिए शहीद हो गया।

आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के विरोध में पाकिस्तान सरकार ने काला दिवस भी मनाया था। दक्षेस बैठक में चर्चा के दौरान कश्मीर में अशांति का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया गया, लेकिन इसका व्यापक तौर पर संदर्भ दिया गया। खान ने पहले दिए गए अपने भाषण में कहा, “अत्यधिक बल प्रयोग कर नागरिकों को दबाना भी आतंकवाद है।”

उन्होंने कहा, “निर्दोष बच्चों का उत्पीड़न व नागरिकों के खिलाफ हिंसा भी आतंकवाद है।” उन्होंने आतिवादी मानसिकता को खत्म करने की जरूरत और क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने के लिए वार्ता पर बल दिया। राजनाथ ने कहा, “केवल आतंकवादियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि इसका समर्थन करने वाले संगठनों, व्यक्तियों तथा देशों के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “आतंकवादी अच्छे और खराब नहीं होते। आतंकवाद बस आतंकवाद है। आतंकवादियों का शहीदों की तरह महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए।”

गृह मंत्री ने कहा, “किसी भी आधार पर आतंकवाद के किसी भी प्रकार या उसके समर्थन को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे लोगों पर तत्काल व प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत है, जो किसी भी तरीके से अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को प्रोत्साहित करते हैं, चाहे वे सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े (स्टेट एक्टर) हों या सत्ता प्रतिष्ठान से स्वतंत्र (नॉन स्टेट एक्टर) हों।”

पाकिस्तानी सरजमीं पर भारत के गृह मंत्री का आतंकवाद के खिलाफ यह संदेश कश्मीर घाटी में अशांति के बीच आया है, जिसका आरोप भारत ने पाकिस्तान पर लगाया है। वानी की मौत के बाद घाटी में हिंसक विरोध-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों व प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में 50 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। घाटी में अशांति से दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच संबंध बिगड़े हैं, खासकर पाकिस्तान के कश्मीर अलाप के बाद, जिसमें राजनयिकों से कश्मीर मामले को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने की अपील की गई है।

इस साल जनवरी में पठानकोट में भारती वायु सेना के अड्डे पर आतंकवादी हमले के बाद किसी भारतीय मंत्री की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है। इस हमले का आरोप भारत ने पाकिस्तान पर लगाया है। यूनाइटेड जेहाद काउंसिल सहित कई आतंकवादी संगठनों द्वारा आयोजित भारत विरोधी प्रदर्शनों के बीच राजनाथ सिंह बुधवार शाम यहां पहुंचे।

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड तथा लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद ने भी लाहौर में भारत विरोधी रैली की और राजनाथ के इस्लामाबाद की सरजमीं पर कदम रखने के खिलाफ पाकिस्तान सरकार की आलोचना की। आतंकवादी संगठनों से खतरों के मद्देनजर, केंद्रीय गृह मंत्री को एक हेलीकॉप्टर से उनके होटल तक ले जाया गया और राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा दी गई।

दोनों देशों के गृह मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब खान इस्लामाबाद के सेरेना होटल में गृह मंत्रियों का अभिवादन कर रहे थे, तो दोनों मंत्रियों ने हाथ तक नहीं मिलाया।

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