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एक दिवसीय दौरे पर बेंगलुरू पहुंचे सचिन पायलट, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कही बड़ी बात

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राजस्थान मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले बेंगलूरु दौरे पर आए पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने राजस्थान की राजनीति पर कुछ इशारों में तो कुछ खुलकर बात कह गए। उन्होंने कर्नाटक के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के साथ लगभग 20 मिनट अकेले में बात भी की। सचिन पायलट केंद्र सरकार की मोनेटाइजेशन नीति के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस के लिए एक दिवसीय दौरे पर बेंगलुरु आए थे।

इस दौरान राजस्थान की सियासत एवं संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कहा कि कौन क्या बनेगा, यह फैसला दिल्ली में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगी। वे लगातार वरीय नेताओं के संपर्क में हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के संदर्भ में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी और मुख्यमंत्री के बीच बातचीत हुई है। राजस्थान मामलों के प्रभारी अजय माकन ने विधायकों और नेताओं से कई दौर की बातचीत की है। वे भी उनसे लगातार संपर्क में हैं। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि राजस्थान में अब उतनी गर्मी नहीं है, मौसम अब ठीक होने लगा है।

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सचिन पायलट ने बताया कि पार्टी और सरकार को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। सरकार के बेहतर संचालन के लिए जब भी कोई बात होगी वे रखेंगे। पिछले 25 वर्षों से राजस्थान में हर पांच वर्ष पर सरकारें बदलती रही हैं। राजस्थान में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और अगर सत्ता में वापसी करनी है तो और बेहतर प्रदर्शन करना होगा। सभी कार्यकर्ताओं को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार में उनकी भागीदारी है। गौरतलब है कि इससे पहले डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जयपुर में मुलाकात की थी। जब गहलोत कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी थे तब डीके शिवकुमार के साथ उनकी नजदीकियां बढीं। अब कांग्रेस आलाकमान के इशारे पर डीके शिवकुमार राजस्थान कांग्रेस में उपजे विवाद को हल करने में महत्वपूर्ण किरदार अदा कर रहे हैं। सूचना के अनुसार, दोनों नेताओं ने अकेले में 20 मिनट तक बात की और उसके बादसचिन पायलट वापस लौट गए।

कांग्रेस रणनीतिक संपत्तियों का निजीकरण नहीं होने देगी

उन्होंने केंद्र सरकार के आर्थिक सुधारों की आलोचना करते हुए बताया कि मोनेटाइजेशन के जरिए सरकार सामरिक और रणनीतिक महत्व की चीजों का भी निजीकरण कर रही है, जो कि हमारी परिसंपत्तियां हैं। सड़कें, रेलवे, दूर-संचार ये सभी रणनीतिक महत्व की संपत्तियां हैं। कांग्रेस केंद्र सरकार की इस नीति का पुरजोर विरोध करेगी और कभी इसे निजी हाथों में नहीं जाने देगी। आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने ही राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन कार्यक्रम की शुरुआत की थी।

एक दिवसीय दौरे पर बेंगलुरू पहुंचे सचिन पायलट, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कही बड़ी बात

उन्होंने कहा था कि इन संपत्तियों का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा, बस इन्हें कमाने के लिए ही अन्य पार्टियों को दिया जाएगा। कुछ साल के बाद ये निजी कंपनियां इसे सरकार को वापस कर देंगी। लेकिन, तब उन संपत्तियों का क्या मूल्य रह जाएगा। वित्त मंत्री का कहना है कि स्वामित्व भारत सरकार के पास होगा। लेकिन, जब यह स्वामित्व कुछ कंपनियों के हाथ जाएगा तो उनका एकाधिकार होगा और वे मनमानी करेंगी। जनता के पैसे से खड़ी की गई इन संपत्तियों को निजी क्षेत्र सरकारी बैकों से ऋण लेकर खरीदेंगे जिसमें लोगों का ही पैसा लगा है।

सचिन पायलट ने बताया कि आज गरीबी को बढ़ते देखा है, अमीरों को अमीर बनते देखा है। अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र बिखर रहा है। केंद्र सरकार ने प्रोत्साहन पैकेज देने की घोषणा की लेकिन नतीजा यह रहा कि अर्थव्यवस्था सिमट रही है। एक प्रश्न के उत्तर में पायलट ने बताया कि उन्हें नहीं पता की संपत्तियों को बेचने से किसानों को क्या लाभ होगा। प्रश्न यह है कि देश की प्राथमिकता क्या है? आज तेल का दाम 100 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा है। रसोई गैस का दाम 900 रुपए से ज्यादा हो गया है। केंद्र सरकार ने कई नारे लाए, स्मार्ट सिटी, स्वच्छ भारत, स्टैंड अप इंडिया, लेकिन कोई भी योजना फलीभूत नहीं हुई। भारत सरकार केवल मार्केटिंग और ब्रांडिंग में माहिर है।

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