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‘जिम्मेदार कौन?’ अभियान: ऑक्सीजन संकट पर प्रियंका गांधी के तीखे सवाल

‘जिम्मेदार कौन?’ अभियान: ऑक्सीजन संकट पर प्रियंका गांधी के तीखे सवाल

लखनऊ: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने ‘जिम्‍मेदार कौन?’ अभियान के तहत लगातार तीखे सवाल पूछ रही हैं। इसी क्रम में उन्‍होंने एक बार फिर ऑक्‍सीजन संकट पर सवाल पूछे हैं।

केंद्र सरकार से सवाल

ऑक्सीजन संकट को लेकर यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार से पूछा कि, आपने महामारी वाले साल 2020 में आखिर क्यों ऑक्सीजन का निर्यात 700 फीसदी तक बढ़ा दिया?

उन्‍होंने कहा कि, ऑक्‍सीजन की कमी के कारण देश भर के तमाम अस्पतालों में लोग तड़प-तड़प कर मर गए। केंद्र सरकार ने अगर पहली व दूसरी लहर के बीच मिले समय में अगर तैयारी योजनाबद्ध ढंग से की होती तो ऑक्सीजन संकट को टाला जा सकता था।

ऑक्‍सीजन संकट की सलाह नहीं मानी: प्रियंका गांधी  

प्रियंका गांधी ने पूछा कि, एम्पावर्ड ग्रुप-6 की ऑक्सीजन संकट की सलाह को मोदी सरकार ने दरकिनार क्यों किया? ऑक्सीजन को कोरोना महामारी की मार के पहले तक प्राथमिक रूप से इंडस्ट्रियल उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता था, इसलिए भारत के पास ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट में उपयोग होने वाले विशेष रूप से बनाये गए क्रायोजेनिक टैंकर्स की संख्या 1200- 600 थी।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि, मोदी सरकार ने कोविड की पहली व दूसरी लहर के बीच इन टैंकर्स की संख्या बढ़ाने या औद्योगिक इस्‍तेमाल में आ रही ऑक्सीजन को मेडिकल सुविधाओं में उपयोग में लाने के लिए आकस्मिक योजना की बारीकियां तैयार करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। उन्‍होंने सवाल पूछा कि, आपके पास एक साल था। सरकार ने आखिर क्यों कोविड की सेकेंड वेव का अंदाजा होने के बावजूद ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट के लिए प्रयोग होने वाले क्रायोजेनिक टैंकर्स की संख्या बढ़ाने के लिए कोई कोशिश नहीं की?

लापरवाही से खड़ा हुआ ऑक्‍सीजन संकट

प्रियंका गांधी ने कहा कि, भारत ऑक्सीजन उत्पादक का सबसे बड़ा देश है, लेकिन केंद्र सरकार की लापरवाही के कारण कोविड की दूसरी लहर के समय ऑक्सीजन संकट खड़ा हुआ और लोगों की जानें गईं। मोदी सरकार ने 150 ऑक्सीजन प्लांट चालू करने के लिए बोली लगाई थी, लेकिन उनमें से अधिकतर प्लांट अभी भी शुरू नहीं हो सके हैं।

यूपी कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि, केंद्र सरकार ने इस संकट काल में भी लोगों की जेब काटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सरकार को संसद की स्वास्थ्य मामलों की स्थाई समिति ने पहले ही सुझाया था कि ऑक्सीजन सिलेंडर के दाम नियंत्रित करने की कोशिश करनी होगी, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर के दाम पिछले साल 4000 रुपए थे, वहीं एक साल में बढ़कर 7000 रुपए हो गई।

राज्‍यों के सीएम बताते रहे ऑक्‍सीजन की कमी

उन्‍होंने कहा कि, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण एक ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल कराने के दाम एक साल में 500 रुपए से बढ़कर 2000 रुपए हो गए। ऑक्सीजन की कमी की बात राज्यों के सीएम प्रधानमंत्री को बताते रहे। लेकिन अपनी गलती न मानकर केंद्र सरकार अदालतों में राज्य सरकारों की ऑक्सीजन मांग का कोटा कम करने को लेकर लड़ाई लड़ने लगी। ऑक्‍सीजन की कमी वास्तव में हमारे देश में थी।

प्रियंका गांधी ने कहा कि, कोरोना महामारी का तांडव बीते एक साल से चल रहा है। केंद्र सरकार ने इस दौरान कोविड पर विजय घोषित की। इस विजय के लिए संसद में मंत्रियों ने प्रधानमंत्री का स्तुतिगान भी कर दिया। मगर, देश के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद दूसरी लहर के खतरे को आपराधिक लापरवाही के चलते अनदेखा किया। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जी की प्रचार-पिपासा के आगे बेबस होकर दूसरी लहर से निपटने की बेसिक तैयारी भी नहीं की।

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