…और इस तरह से देखते ही देखते आम से खास बन गए गायत्री प्रजापति

 

अखिलेश सरकार के वो मंत्री जिसे हर काम में महारात हासिल हो गई थी। वो जितना अपने काम के लिए मशहूर था उतना ही विवादों के लिए जाना जाता था। उस शख्स ने अपने काम और विवादों के कारण सुर्खियां बटोरी बल्कि यादव परिवार को कथित तौर पर दो हिस्सों में बांट दिया। वो शख्स है कोई और नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेताओं में शुमार गायत्री प्रजापति है। मंत्री पद की शपथ लेते समय गायत्री ने कभी ये नहीं सोचा होगा कि उसके कामों का परिणाम एक दिन उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा देगा।

फर्श से अर्श तक का सफर

एक मंत्री होने के बाबजूद चंद सालों में फर्श से अर्श तक का सफर तय करने वाले गायत्री प्रजापति ने करोड़ों की सपंत्ति यूं ही नहीं इकट्ठा कर ली बल्कि इसके पीछे एक बहुत लंबी कहानी है। इस कहानी में जितनी उनकी मेहनत है उतना ही यादव परिवार, या यूं कहें कि मुलायम सिंह यादव का सहयोग है। गायत्री को करीब से जानने वालों का कहना है कि वो साल 2002 तक उनकी और उनके परिवार की स्थिति ये थी कि वो बीपीएल कार्ड धारक थे यानी ग़रीबी की रेखा से नीचे आते थे।

आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2002 में हुए विधानसभा चुनावों में गायत्री ने चुनाव लड़ने के लिए जो हलफनामा दिया उसमें उन्होंने अपनी संपत्ति कुछ हजार रुपये बताई थी। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों तक उनके पास करोड़ों की जायदाद इकट्ठा हो गई अब जिसका आंकलन करना भी मुश्किल है।

कैसे हुई राजनीति में एंट्री

गायत्री प्रजापति राजनीतिक गलियारों में कूच करने से पहले एक मामूली ठेकेदार और प्रोपर्टी डिलरिंग का काम किया करते थे। समय बदलता गया और उन्होंने समाजवादी पार्टी से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी। सपा से नजदीकियां तो बढ़ी लेकिन वो क्या कारण थे जिसकी वजह से गायत्री को विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार बनाया गया ये तो अंदरूनी सूत्र ही बता सकते हैं। एक समय ऐसा आया कि वो सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खास लोगों की लिस्ट में शुमार हो गए। वो वक्त ही ऐसा था अखिलेश के मुख्यमंत्री होने के बाबजूद कैबिनेट का कार्यभार मुलायम के हाथों में था।

फरवरी 2013 में गायत्री प्रजापति को मुलायम सिंह की सिफ़ारिश पर अखिलेश सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री का पद मिला लेकिन कुछ ही दिन बाद उन्हें खनन मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिल गया। ये वो समय था जब गायत्री का करियर उफान पर था। वो दिन शायद गायत्री के अच्छे  थे कि महज 6 महीनों के अंदर ही उन्हें कैबिनेट में शामिल कर लिया गया।

मुलायम के खास

हर कोई जानता है कि समाजवादी पार्टी में जो शख्स मुलायम सिंह यादव खास हो गया उसका करियर परवान चढ़ना लाजिम है। गायत्री के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ चंद दिनों में गायत्री ने वो सफर तय कर लिया, जिसका राजनेता सपना देखते हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने खनन में भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की बात कही थी। लेकिन इन आरोपों के बावजूद गायत्री में मुलायम सिंह का विश्वास बरकरार रखा। भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर अखिलेश ने कैबिनेट से उन्हें बर्खास्त कर दिया लेकिन मुलायम के दबाब बनाने के बाद उनकी वापसी हुई। 

आरोपी होने के बाबजूद दिय़ा गया टिकट

आरोपी होने के बाबजूद उन्हें समाजवादी पार्टी ने अमेठी से उम्मीदवार बनाया। हालांकि इन चुनावों में सपा और कांग्रेस गठबंधन करके चुनाव लड़ रही थी और अमेठी को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है इसके बाबजूद उन्हें टिकट दिया गया, लेकिन अंत में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा।

वर्दी में खौफ

कहते हैं जो इंसान जितनी जल्दी आसमान चढ़ता है उतनी ही जल्दी ही गिरता है गायत्री प्रजापति के साथ भी कुछ ऐसा हुआ जितनी जल्दी वो एक विधायक से कैबिनेट मंत्री बनें उतनी ही जल्दी उनसे ये सब छीन लिया गया। कार्यकाल के दौरान गायत्री पर जमीन हड़पने, अवैध वसूली करने के कई सारे आरोप लगते रहे लेकिन उन पर शिकंजा उस वक्त कसा गया जब एक महिला ने उन पर गैंगरेप का आरोप लगाया और न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

गायत्री का सूबे की पुलिस में इस कदर खौफ था कि पीड़िता की किसी थाने में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई। कोर्ट की फटकार के बाद 18 फरवरी को गायत्री प्रजापति और उनके 6 साथियों के खिलाफ राजधानी लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में रिपोर्ट लिखी गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि गायत्री प्रजापति ने सरकारी आवास पर उसके साथ दुष्कर्म किया। रिपोर्ट तो लिख ली गई लेकिन सत्ताधारी पार्टी होने कारण गायत्री पर पुलिस शिकंजा नहीं कस पाई। लेकिन पुलिस उस समय उस हरकत में आई जब उसे सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगी।

हरकत में आई पुलिस

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने गायत्री पर शिकंजा कसने के लिए लगातार कोशिश की। पहले उनके कुछ साथियों को हिरासत में लिया गया लेकिन गायत्री अपना घर और सियासी दंगल छोड़कर फरार चल रहे थे आखिरकार वो दिन आ ही गया जब पुलिस ने गायत्री को हिरासत में ले लिया। गायत्री पर शिकंजा कसते ही उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

यूपी में गायत्री प्रजापति की कहानी सूबे की सियासत और आपराधियों की धर-पकड़ और सुरक्षा का दावा करने वाले राजनेताओं के लिए वो आइना है जिसे साफ करना शायद नामुमकिन है। गायत्री प्रजापति समाजवादी पार्टी के शासनकाल में वो बदनुमा दाग है जो ना तो धुल पाएगा और ना ही साफ हो गया।

 आशु दास