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भारतीय एथ्नोबोटनी के जनक डॉ. एस के जैन का निधन

डॉ़ एस के जैन भारतीय एथ्नोबोटनी के जनक डॉ. एस के जैन का निधन

लखनऊ। विश्व अर्थशास्त्री पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई वैज्ञानिक डॉ. एस के जैन ने मंगलवार को लखनऊ अपने निवास पर अंतिम सांस ली। डॉ. जैन को भारतीय एथ्नोबोटनी का जनक भी कहा जाता है।

एनबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक पीए शिर्के ने बताया कि डॉ. एस के जैन इंसा एफ एन ए फेलो व वैश्विक मान्यता प्राप्त वनस्पतिशास्त्री थे। उन्होंने बताया कि डॉ. जैन भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण, कोलकाता के पूर्व निदेशक भी रह चुके थे। उन्होंने वनस्पति विज्ञान की भारतीय एथ्नोबोटनी शाखा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

डॉ शिर्के ने बताया कि डॉ. जैन ने एथ्नोबोटनी संस्थान, ग्वालियर की स्थापना की थी। बाद में जिसका नाम डॉ. एस. के. जैन इंस्टीट्यूट ऑफ एथ्नोबायोलॉजी रखा गया था। डॉ जैन 30 से अधिक पुस्तकों एवं सैकड़ों शोध पत्र के लेखक,  दर्जनों विद्वानों के मार्गदर्शक,  प्रख्यात “फ्लोरा ऑफ़ इंडिया” पुस्तक के संपादक थे।

इतना ही नहीं वे एथ्नोबोटनी भारतीय वानस्पतिक सोसाइटी और भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण, कोलकाता एवं एथ्नोबोटनी संस्थान के लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कारों से भी सम्मानित थे। भारत सरकार द्वारा डॉ. जैन को प्रतिष्ठित ‘पीताम्बर पंत राष्ट्रीय पर्यावरण फैलोशिप’ से सम्मानित किया गया था।

डॉ. शिर्के ने बताया कि डॉ. जैन ‘विश्व अर्थशास्त्री पुरस्कार’ प्राप्त करने वाले पहले एशियाई थे। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि उनके द्वारा लिखित औषधीय पौधों पर एक पुस्तक ने अमेरिकी अदालत में एक लोकप्रिय मामले में भारत की प्रसिद्ध हल्दी के पेटेंट को जीतने में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी।

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