February 27, 2024 7:09 am
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सुबह से ही नवमी के उत्सव में झूम रहे देशवासी, कन्या पूजन कर ले रहे मां का आशिर्वाद

kanya pujan सुबह से ही नवमी के उत्सव में झूम रहे देशवासी, कन्या पूजन कर ले रहे मां का आशिर्वाद

राम नवमी के दिन श्रद्धालु कन्या पूजन कर रहे हैं और हवन आदि कर देवी के चरणों में शीष झुका रहे हैं। श्रद्धालु वांसतिक नवरात्र का अष्टमी व्रत रहने के साथ रामनवमी का त्योहार धूमधाम से मना रहे हैं। भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के इस त्योहार को लेकर लोगों में खासा उल्लास रहता है।

जानें कब लगेगी अष्टमी और नवमी तिथि

12 अप्रैल 2019 दिन शुक्रवार को सुबह 10:18 बजे से 13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह दिन में 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी।

13 अप्रैल दिन शनिवार को महानवमी का व्रत होगा क्योंकि 13 अप्रैल को सुबह 08:16 बजे के बाद ही नवमी तिथि लग जाएगी जो 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक ही विद्यमान रहेगी।

राम नवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। ज्योतिषाचार्य जितेंद्र नाथ पाठक ने बताया कि उत्तर भारत में रामनवमी का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन उपवास और ब्राह्मणों को भोजन कराना भी बहुत फलदायक है।

कहते हैं ऐसा करने से घर में धन-समृद्धि आती है। ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि नवरात्र के व्रत के बाद नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। इस दिन कन्या का पूजन कर भोजन कराने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सभी दुखों का नाश होता है। घर में सुख समृद्धि आती है।

कैसे करें कन्या पूजन

कन्या भोजन से पहले कन्याओं को आमंत्रित कर उनका स्वागत करें, उनके पैर धोएं, उनका श्रृंगार करें और उसके बाद उन्हें भोजन करवाएं। भोजन में मिष्ठान और फल शामिल करना न भूलें। इसके बाद उन्हें यथायोग्य उपहार देकर उनके घर तक पहुंचाएं। किसी भी वर्ण, जाति और धर्म की कन्या को आप कन्या पूजन के लिए आमंत्रित कर सकती हैं।

कितनी कन्याओं को करें आमंत्रित

यदि आप सामर्थ्यवान हैं, तो नौ से ज्यादा या नौ के गुणात्मक क्रम में भी जैसे 18, 27 या 36 कन्याओं को भी आमंत्रित कर सकती हैं। यदि कन्या के भाई की उम्र 10 साल से कम है तो उसे भी आप कन्या के साथ आमंत्रित कर सकती हैं। यदि गरीब परिवार की कन्याओं को आमंत्रित कर उनका सम्मान करेंगे, तो इस शक्ति पूजा का महत्व और भी बढ़ जाएगा। यदि सामर्थ्यवान हैं, तो किसी भी निर्धनकन्या की शिक्षा और स्वास्थ्य की यथायोग्य जिम्मेदारी वहन करने का संकल्प लें।

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