November 28, 2021 4:17 am
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भारत में राजनीतिक निर्णय लेने में शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण एक समस्या-रघुराम राजन

भारत में राजनीतिक निर्णय लेने में शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण एक समस्या-रघुराम राजन

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन  ने हाल ही में एक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने  कहा कि भारत में राजनीतिक निर्णय लेने में शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण एक प्रमुख समस्या है। इस संबंध में उन्होंने गुजरात में हाल ही में अनावरण की गई सरदार पटेल की मूर्ति ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना का जिक्र किया।

 

भारत में राजनीतिक निर्णय लेने में शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण एक समस्या-रघुराम राजन
भारत में राजनीतिक निर्णय लेने में शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण एक समस्या-रघुराम राजन

 

राजन ने कहा कि इस परियोजना के लिए भी प्रधानमंत्री कार्यालय की मंजूरी लेने की जरूरत पड़ी।राजन ने यह बयान बर्कले में शुक्रवार को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में  दिया।  उन्होंने कहा कि  भारत में समस्या का एक हिस्सा यह है कि वहां राजनीतिक निर्णय लेने की व्यवस्था हद से अधिक केंद्रीकृत है।

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गौर करने की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं जयंती पर 31 अक्टूबर को गुजरात के नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का अनावरण किया था। विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति 182 मीटर की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को 2,989 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया है। मालूम हो कि यह महज 33 महीने में तैयार हुई है। राजन नेके मुताबिक भारत एक केंद्र से काम नहीं कर सकता है। भारत तब काम करता है जब कई लोग मिलकर बोझ उठा रहे हों। जबकि आज भारत में केंद्र सरकार के पास शक्तियां अत्यधिक केंद्रीकृत हैं।

राजन ने कहा कि इसका उदाहरण है बहुत सारे निर्णय के लिये प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति लेनी होती है। उन्होंने कहा जब तक प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुमति नहीं मिल जाती है, कोई निर्णय नहीं लेना चाहता। इसका अर्थ यह है कि प्रधानमंत्री यदि प्रतिदिन 18 घंटे भी काम करें, उनके पास इतना ही समय है। राजन ने पीएम को सराहते हुए कहा कि वह काफी मेहनती प्रधानमंत्री हैं।

सरदार पटेल की इस इतनी बड़ी मूर्ति को समय पर पूरा किया

पूर्व गवर्नर ने कहा कि उदाहरण के लिए हमने सरदार पटेल की इस इतनी बड़ी मूर्ति को समय पर पूरा किया। इस पर सभागार में हंसी के ठहाके और तालियों की गड़गड़ाहट सुनायी पड़ी। राजन ने कहा कि यह दिखाता ”जब चाह होती है तो राह भी है”। लेकिन क्या इस तरह की चाह हम अन्य चीजों के लिये भी देख सकते हैं? शक्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण के अलावा उन्होंने भारत में नौकरशाही की अनिच्छा को एक बड़ी समस्या बताया। सार्वजनिक क्षेत्र में पहल को लेकर अनिच्छा को भी उन्होंने बड़ी समस्या बताया।

रघुराम राजन ने कहा कि जब से भारत में भ्रष्टाचार के घोटालों का खुलासा होने लगा है,नौकरशाही ने अपने कदम पीछे खींच लिए। बता दें कि रघुराम राजन का जन्म 1963 में भोपाल में हुा था।मालूम हो कि राजन भारतीय रिजर्व बैंक के 23वें गवर्नर रहे हैं। उन्होंने सितंबर 2013 से सितंबर 2016 तक भारतीय रिजर्व बैंक में बतौर गवर्नर काम किया है।

महेश कुमार यादव

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