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इस महीने भारत करेगा सुखोई से ब्रह्मोस मिसाइल छोड़ने का परीक्षण

Brhamos इस महीने भारत करेगा सुखोई से ब्रह्मोस मिसाइल छोड़ने का परीक्षण

नई दिल्ली। सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमान से परमाणु सक्षम ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दागने के अंतिम परीक्षण दिसंबर में होने का अनुमान है। इस मिसाइल को बगैर किसी लक्ष्य के छोड़ने का एक परीक्षण इसी माह होना है। भारत और रूस ने मिलकर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्माण किया है। इसके निर्माताओं ने कहा है कि इस मिसाइल से भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

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ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक सुधीर मिश्र ने आईएएनएस से कहा कि हम इस माह 24 अगस्त तक एक ड्रॉप परीक्षण करने की उम्मीद कर रहे हैं। ड्रॉप परीक्षण से विमान की मिसाइल छोड़ने वाली यंत्रावली का परीक्षण होगा। यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में किया जाएगा। इसका अंतिम परीक्षण बंगाल की खाड़ी में नौसेना की सेवा से हटा दिए गए एक पोत पर निशाना साधकर किया जाएगा।

मिश्र ने कहा कि ड्राप परीक्षण के बाद हमलोग यह देखेंगे कि क्या इसके सॉफ्टवेयर और अन्य प्रणाली में कुछ और संशोधन की जरूरत है? मिश्र ने कहा, “विमान से मिसाइल दागने का परीक्षण करके इस वजह से विमान पर पड़ने वाले प्रभाव और विमान में मिसाइल के व्यवहार के प्रभाव के बारे में अध्ययन किया जाएगा।”

एक सुखोई एसयू-30 विमान को ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण से लैस किया गया है। पहली बार उस विमान ने गत 25 जून का नाशिक में उड़ान भरी थी। तब से यह मिसाइल बगैर किसी परेशानी के लगभग 10 घंटे की उड़ान विमान के साथ भर चुकी है। एसयू-30 को भारत का सबसे क्षमतावान युद्धक विमान माना जाता है। ब्रह्मोस मिसाइल के लिए इस विमान का चुनाव इसके टाइटेनियम वाले एयरफ्रेम एवं मिसाइल दागने के लिए इसमें लगाए गए बहुत मजबूत अल्युमिनियम मिश्रित धातु की वजह से किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इस विमान में ब्रह्मोस मिसाइल के लिए जो संशोधन किए गए हैं, उनमें परमाणु विस्फोट की वजह से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों से विमान अप्रभावित रहें, इसके लिए विमान के इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों को सख्त करने का काम भी किया गया है। विमान के साथ मिसाइल में भी बदलाव किया गया है। ब्रह्मोस-ए में स्थिरता के लिए छोटे किए गए बूस्टर और फिन्स लगाए गए हैं।

इस मिसाइल को 500 मीटर से लेकर 14000 मीटर तक की ऊंचाई से दागा जा सकता है। यह 100-150 मीटर ऐसे ही गिरता है, उसके बाद इसका क्रूज चरण शुरू होता है और जब लक्ष्य से 15 मीटर रह जाता है, तो अंतिम चरण शुरू होता है। ब्रह्मोस मिसाइल का हवाई संस्करण समुद्र एवं जमीन से दागे जाने वाली इस मिसाइल के संस्करणों से हल्का है।

अधिकारियों का कहना है कि ब्रह्मोस मिसाइल को अन्य लड़ाकू विमानों में लगाए जाने के बारे में कोई भी फैसला एसयू-30 पर परीक्षण हो जाने के बाद ही किया जाएगा। भारतीय नौसेना के मिग-29 के और राफेल विमानों के लिए इस मिसाइल के छोटे संस्करण की चर्चा चल रही है। भारत फ्रांस से राफेल विमान खरीद रहा है।

सुरक्षा से जुड़ी मंत्रिमंडल की समिति से एसयू-30 पर ब्रह्मोस मिसाइल लगाने की स्वीकृति वर्ष 2012 के अक्टूबर में ही मिल गई थी। करीब 40 विमानों को ब्रह्मोस मिसाइल से लैस किया जाएगा। ब्रह्मोस मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) एवं रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी एंटरप्राइज एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया (एनपीओएम) की संयुक्त परियोजना है।

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