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चुनाव में ही भाजपा को याद आते हैं राम बोले अयोध्यावासी

ram mundir चुनाव में ही भाजपा को याद आते हैं राम बोले अयोध्यावासी

नई दिल्ली। जिस राम को लेकर भाजपा ने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था आज वो राम और अयोध्या दोनों ही अपने विकास को तरस रहे हैं। रामलला तम्बू में तो अयोध्यावासी विकास से दूर मुफलिसी के आलम में जीने को मजबूर हैं। सूबे में भारतीय जनता पार्टी की सरकार 2002 के बाद नहीं बनी तो 2004 के बाद केन्द्र की सत्ता से भी पार्टी बाहर रही। लेकिन इसके पहले जब पार्टी सत्ता में थी तो ना राम याद आते थे ना ही अयोध्या फिर 2014 में राम और अयोध्या की शरण में भाजपा को जाना पड़ हुंकार भरी लेकिन केन्द्र की सत्ता में काबिज होते ही फिर राम और अयोध्या केवल वादों में खो गये।

ram mundir चुनाव में ही भाजपा को याद आते हैं राम बोले अयोध्यावासी

सूबे में चुनावी बयार बह रही है। भाजपा के दो बड़े नेताओं ने एक बार फिर राममंदिर निर्माण की बात कह इस मुद्दे को गरम करने की कोशिश की है। इसके साथ ही विहिप ने भी इलाहाबाद के संगम तट पर केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की जिसमें भी एक बार फिर राममंदिर का मुद्दा सामने निकल कर आया है। इसके साथ ही एक बार फिर राम के सहारे भाजपा सत्ता का गमित साधने में जुटने की फिराक में है।

इस मामले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने पहले बयान देते हुए कहा कि सूबे में अगर भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत से आती है तो हम मंदिर का भव्य निर्माण करेंगे। इसके ठीक बाद जब बयान पर सवाल उठे तो पलटी मारते हुए कहा कि साहब मेरे बयान को तोड़-मरोड़ पर पेश किया गया है। फिर भाजपा के फायरब्रांड नेता विनय कटियार ने भी राममंदिर के निर्माण के लिए व्यापक आंदोलन करने के बात कही। यानी भाजपा फिर राम के बहाने लोकतंत्र का ये यज्ञ पूरा करना चाहती है। लेकिन अयोध्या क्या कहती है । इसे जानना देश और प्रदेश दोनों के लिए जरूरी है।

रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े अयोध्यावासियों ने बेबाक रखी राय

रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी 90 के दशक की विहिप की फायरब्रांड़ नेता रामायणी डॉ ओमश्री भारती शायद अब भाजपा विहिप इनको भूल चुकी हो लेकिन इनके मन में अब बदल रही भाजपा के नीतियों को लेकर जो रोष है वो साफ इनके शब्दों में झलक रहा है। भारत खबर से बात करते हुए उन्होने कहा कि जो अयोध्या 90 के दशक के पहले थी शायद आज से ज्यादा खुश थी। रामलला के सर पर छत थी लेकिन आज रामलला तम्बू में और पीएम मोदी 7 लोककल्याण मार्ग पर जनता के कल्याण में बैठे है। सत्ता संभालने के पहले फैजाबाद आये थे रैली की भाषण दिया लेकिन राममंदिर और अयोध्या को लेकर वादे ही मिले आज तक रामलला के लिए या अयोध्या के लिए कोई ठोस निर्यण सामने नहीं आया। पता नहीं 2 सालों में तो अच्छे दिन का कोई दिन नहीं दिखा आगे राम जाने।

वहीं इस मुद्दे पर रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक महंत आचार्य सतेन्द्रदास ने भी साफतौर पर कहा कि अयोध्या और रामलला दोनों ही मुद्दे भाजपा को सत्ता में आने के लिए सबसे आसान नजर आते हैं। राम मंदिर निमार्ण की बात अब भाजपा के मुंह से सुनकर केवल हंसी ही आती है। क्योंकि भाजपा ने लगातार मंदिर के निर्माण का केवल वादा ही किया है। लेकिन पूरा करने के समय वो अपने वादों से मुकरती है। आखिर इस वजह से अब जनता भाजपा से दूर होती जा रही है। भाजपा ने अयोध्या और राममंदिर के लिए कभी कुछ नहीं किया और आगे आने वाले समय में ये केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करेंगे बस।

इन सब के बाद भी अगर आप अयोध्या का रूख करें तो यहां की जनता अब राममंदिर के मुद्दे को लेकर भाजपा के छलावे से आजिज आ चुकी है। जनता विकास की राह देख रही है। रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य जैसी बड़ी समस्याएं यहां पर अपना सुरसा मुंह बाये हुए हैं। लेकिन ना राज्य की सरकारें इधर ध्यान देती हैं और ना ही केन्द्र की सरकार केवल वादों की बात होती है । फिर चुनाव के बाद इन गलियों में कोई वापस झांकने तक नहीं आता । देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि जिस राम के नाम पर पार्टी ने सत्ता की सीढ़ी चढ़ना शुरू किया वो राम अपने सर पर छत बांट जोह रहे हैं।
Piyush Shukla चुनाव में ही भाजपा को याद आते हैं राम बोले अयोध्यावासीअजस्रपीयूष

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