November 27, 2021 8:08 pm
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अपनों से दूर और अपनों द्वारा ठुकराए हए बुजुर्गों ने मनाई वृद्ध आश्रम में दिवाली

diwali 2 अपनों से दूर और अपनों द्वारा ठुकराए हए बुजुर्गों ने मनाई वृद्ध आश्रम में दिवाली

हरियाणा धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के वृद्धाश्रम में अपनों से दूर और अपनों से नकारे गए बुजुर्गों ने वृद्धाश्रम में दीपावली का त्यौहार मनायाष प्रेरणा के संस्थापक जय भगवान ने बताया कि वृद्धाश्रम में शंखनाद करते हुए बुजुर्गों के साथ दिवाली मनाई जा रही है । दीपावली, प्रेरणा वृद्धाश्रम सैकड़ों दीपकों के साथ जगमगा उठा। सामाजिक धारा से कटे और अपनों से दूर बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी लाने के लिए धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के वृद्धाश्रम में प्रेरणा संस्था के सदस्यों और परिवार के लोगों द्वारा भव्य दीपावली का कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

इस मौके पर नन्हे बच्चों को और वृद्धों को व्यंजन, कपड़े, मोमबत्तियां तथा अन्य उपहार वितरित किये गए। प्रेरणा संस्था के संस्थापक जयभगवान सिंगला के परिवार के सभी सदस्य प्रेरणा के बच्चों और वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के साथ दीपावली का त्यौहार मना रहे हैं। जयभगवान सिंगला व प्रेरणा से संस्था के सदस्यों तथा पदाधिकारियों ने इस कार्यक्रम के माध्यम से अपने परिवारों से दूर वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के चेहरों पर ख़ुशी लाने और मानसिक शांति प्रदान करने के लिए दीपावली के अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन भी किया गया है।

diwali अपनों से दूर और अपनों द्वारा ठुकराए हए बुजुर्गों ने मनाई वृद्ध आश्रम में दिवाली

बता दें कि संस्था के संस्थापक ने बताया कि इस अवसर पर बुजुर्ग दीपावली उत्सव का आनंद ले रहे हैं। इस मौके पर वृद्धाश्रम में सब कुछ खोने के बाद भी बुजुर्ग खुशियां बटोरते दिखे। उन्होंने कहा कि जिन्हें उनके अपनों ने तो ठुकरा दिया, लेकिन यह फिर भी प्रेरणा संस्था के सदस्यों के साथ छोटी-छोटी खुशियों से अपने जीवन में रंग भर रहें हैं। बुजुर्गों ने भी संस्था के सदस्यों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यही लोग अब उनके परिवार के सदस्य हैं। दीपावली उत्सव कार्यक्रम के दौरान वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को मिठाईयां तथा उपहार भी वितरित किये गए।

जय भगवान सिंगला ने बताया कि उनका परिवार सभी त्यौहार प्रेरणा वृद्धाश्रम के बुजुर्गों तथा बच्चों के साथ मनाते हैं। इस मौके पर सब बुजुर्गों के चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी। उन्हें अपनों से दूर होने का एहसास नहीं बल्कि एक बड़े परिवार में शामिल होने का एहसास हो रहा था।

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