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कोरोना और ब्लैक फंगस के बाद अब ये बीमारी आई सामने, बच्चों को कर रही संक्रमित

children कोरोना और ब्लैक फंगस के बाद अब ये बीमारी आई सामने, बच्चों को कर रही संक्रमित

भारत कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इसी बीच ब्लैक फंगस ने भी देशभर में दहशत फैला रखी है। वहीं अब एक ओर बीमारी है जो दस्तक दे चुकी है।

जी हां, इस बीमारी का नाम है मल्टी ऑर्गन इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम यानी एमआईएस-सी ये बच्चों के बीच फैलती है। दरअसल, फरीदाबाद में इस बीमारी के करीब 25 मामले सामने आए हैं और सभी बच्चों का निजी अस्पतालों में अलग-अलग इलाज चल रहा है।

100 बच्चों पर हो रहा अध्ययन

ईएसआई मेडिकल कॉलेज आफ अस्पताल फरीदाबाद के रजिस्ट्रार डॉक्टर ए के पांडे ने बताया कि इस बीमारी को लेकर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के तत्वाधान में भारत के 4 बड़े मेडिकल संस्थानों के द्वारा 100 बच्चों के साथ रिसर्च जारी है और यह सभी वह बच्चे हैं जो कोरोना संक्रमित हो चुके हैं लेकिन दोबारा से वह बीमार हो रहे है। इस शोध में फरीदाबाद ईएसआई मेडिकल कॉलेज ऑफ अस्पताल और दिल्ली सफदरगंज, मौलाना मेडिकल कॉलेज दिल्ली के साथ बेंगलुरु के सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज को शामिल किया गया है। इन चारों मेडिकल संस्थानों में 100 बच्चों पर अध्ययन किया जा रहा है।

‘आने वाले समय में बढ़ सकते हैं मामले’

अब तक की रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद बच्चों के शरीर में जो हाई एंटीबॉडी बन रही है बच्चों का शरीर उसको झेल नहीं पा रहा है और वो हाई एंटीबॉडी बच्चों के दूसरे पाट्स को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि यह रोग केवल उन्हीं बच्चों में नहीं है जो कोरोना संक्रमण खेल चुके हैं बल्कि उन बच्चों में भी सामने आ रहा है जिन बच्चों के माता-पिता या परिवार में से कोई अन्य कोरोना पॉजिटिव रह चुका है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मामले भले ही कम हो लेकिन संभावित आने वाले समय में इन मामलों में संख्या देखने को मिलेगी यह बीमारी पहले भी हमारे देश में थी, लेकिन कोरोना की वजह से बॉडी की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हुआ है। जिसके चलते बीमारी तेजी से पनप रही है।

करीब 25 दिन बाद यह बीमारी वापस लौट कर आती हैं ।ऐसे में अगर कोई भी बच्चा कोरोना सिर्फ ठीक हुआ है तो उसको विशेष ध्यान से रखने की जरूरत है । भारत में बीमरी का सबसे बड़ा कारण है कि प्रॉपर तरीके से प्रत्येक व्यक्ति की ट्रेसिंग नहीं होना है क्योंकि बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी टेस्ट नहीं कराया और वह पॉजिटिव होकर भी ठीक हो चुके हैं और उन्हीं से उनके बच्चों में इन्फेक्शन फैला है।

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