प्रधानमंत्री कावेरी प्रबंधन समिति जल्द गठित करें : एआईएडीएमके

चेन्नई| ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल वादकालीन आवेदन (इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन) को आगे बढ़ाने के लिए जल संसाधन मंत्रालय को निर्देश देने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री से कावेरी प्रबंधन समिति (सीएमबी) के तत्काल गठन की भी अपील की। लोकसभा के उपाध्यक्ष एम.थंबीदुरई के नेतृत्व में एआईएडीएमके के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक मार्च किया और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।

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जल संसाधन मंत्रालय ने तीन अक्टूबर, 2016 को सर्वोच्च न्यायालय में एक इंटरलोक्यूटोरी एप्लिकेश दायर किया था, जिसमें चार अक्टूबर, 2016 तक कावेरी प्रबंधन समिति का गठन करने के 30 सितंबर, 2016 के आदेश में संशोधन करने की मांग की गई थी। मंत्रालय ने अपने आवेदन में कहा कि सीएमबी का गठन अभी नहीं किया जा सकता है।

एआईएडीएमके के सांसदों ने अपने ज्ञापन में मोदी से कहा, “इस संदर्भ में, हम आपसे अपील करते हैं कि आप मामले में हस्तक्षेप करें और जल संसाधन मंत्रालय द्वारा 30 सितंबर, 2016 को दायर वादकालीन आवेदन को वापस लेने का निर्देश दें, जल्द से जल्द कावेरी प्रबंधन समिति का गठन करें और कावेरी नदी पर निर्भर लाखों किसानों के साथ और तमिलनाडु के लोगों के साथ न्याय करें।

ज्ञापन के मुताबिक, “सर्वोच्च न्यायालय में भारत सरकार का रुख वादकालीन आवेदन से बिल्कुल अलग है। भारत सरकार का रुख तमिलनाडु और किसानों के खिलाफ है। एआईएडीएमके के सांसदों ने कहा कि संघीय व्यवस्था में भारत सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह सभी राज्यों के प्रति निष्पक्षता बरते। एआईएडीएमके के मुताबिक, कर्नाटक के केंद्रीय मंत्री कर्नाटक सरकार द्वारा तमिलनाडु को पानी न देने के रुख का खुला समर्थन कर रहे हैं। ज्ञापन के मुताबिक, “यह संविधान के खिलाफ है, क्योंकि वे पूरे देश के मंत्री हैं। केंद्रीय मंत्रियों के इस रुख से तमिलनाडु के लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।”

तमिलनाडु सरकार की तरफ से मुख्य सचिव राम मोहन राव ने सोमवार को केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर को एक पत्र लिखा और वादकालीन आवेदन को वापस लेने का आग्रह और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक, कावेरी प्रबंधन समिति का जल्द से जल्द गठन का आग्रह किया। तमिलनाडु व कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के जल के बंटवारे का विवाद लंबे समय से चल रहा है।