कार्तिक मास में गंगा स्नान कर कमाएं पुण्य

नई दिल्ली। सोमवार यानि 14 नवंबर को गंगा स्नान के साथ कार्तिक मास शुरू हो जाएगा…कार्तिक के इस महीने को पुण्यों का महीना भी माना जा जाता है। हिंदू धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान कर लोग पुण्य-धर्म कमाते हैं। हिंदू धर्म में पंचाग के अनुसार वर्ष के आठवें महीने को कार्तिक मास माना जाता है।

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ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले नदी में स्नान करने से मनचाहे फल की प्राप्कि होती है। कार्तिक मास स्नान की शुरुआत शरद पूर्णिमा से होती है और इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा को होता है।

कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान का महत्व:-

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन स्नान करने से पुण्य मिलता है गृहस्थ व्यक्ति को तिल व आंवले का चूर्ण लगाकर स्नान करना चाहिए।

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। कार्तिक पुर्णिमा के दिन पवित्र नदी व सरोवर एवं धर्म स्थान में जैसे, गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्याकाशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

कार्तिक पूर्णिमा में दान का महत्व:-

इस दिन किये जाने वाले अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन जो भी दान किया जाता हैं उसका कई गुणा लाभ मिलता है। इस दिन किये जाने वाले अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन जो भी दान किया जाता हैं उसका कई गुणा लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में उसे पुनःप्राप्त होता है।

लक्ष्मी की होती है कृपा:-

इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में खुशियां और संपन्नता आती है। कार्तिक पूर्णिमा पर गरीबों को चावल दान करने से चन्द्र ग्रह शुभ फल देता है। इस दिन जो भी जातक मीठे जल में दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाता है उस पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है। कार्तिक पूर्णिमा के गरीबों को चावल दान करने से चन्द्र ग्रह शुभ फल देता है।

कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था गुरूनानक का जन्म:-

कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि पर व्यक्ति को बिना स्नान किए नहीं रहना चाहिए सिख सम्प्रदाय:में कार्तिक पूर्णिमा का दिनके रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन सिख सम्प्रदाय के अनुयायी सुबह स्नान कर गुरूद्वारों में जाकर गुरूवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताये रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।