भारत के साथ कोई विवादास्पद समझौता नहीं होगा : प्रचंड

काठमांडू। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह प्रस्तावित उनके चार दिवसीय भारत दौरे के दौरान किसी भी विवादास्पद समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होगा। प्रचंड ने संसद की अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं श्रम समिति के समक्ष रविवार को कहा, “राष्ट्रीय हित के खिलाफ किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होगा।” उन्होंने कहा, “यह दौरा नेपाल के प्रधानमंत्री का होगा, न कि पुष्प कमल दहाल या प्रचंड का। इसलिए इस बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।”

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लेकिन उन्होंने कहा कि उनका भारत दौरा अवसर के नए द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा, “मेरा दौरा एक चुनौतीपूर्ण अवसर है। यह द्विपक्षीय संबंधों में नई गति लाएगा।” प्रचंड पर विभिन्न हलकों से इस बात का दबाव है कि दौरे के दौरान किसी विवादास्पद समझौते पर हस्ताक्षर न किया जाए। उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा है कि दौरे से न केवल संबंध सामान्य होंगे, बल्कि आपसी विश्वास की एक मजबूत नीव तैयार होगी।” प्रधानमंत्री ने संसदीय समिति के समक्ष स्पष्ट किया कि वह किसी नए समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, बल्कि पुराने समझौतों की समीक्षा होगी और उन्हें लागू करने पर बातचीत होगी। प्रचंड के दौरे के दौरान भूकंप बाद निर्माण कार्य के लिए अतिरिक्त मदद, जलविद्युत से संबंधित खरीदारी व्यापार समझौतों, और पोस्टल हाइवे जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रचंड 15 सितंबर को भारत के लिए रवाना होंगे और 18 सितंबर को वापस लौट आएंगे। प्रचंड ने समिति के सदस्यों से कहा कि 15 सितंबर को वह भारत में नेपाली नागरिकों से मिलेंगे, नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास में एक स्वागत समारोह में हिस्सा लेंगे और विदेशी हस्तियों से मिलेंगे। दूसरे दिन एक आधिकारिक बैठक होगी, जब प्रचंड हिमाचल प्रदेश में एक जलविद्युत परियोजना का भी दौरा करेंगे, और नई दिल्ली लौटने के तत्काल बाद बुद्धिजीवियों के साथ बातचीत करेंगे। प्रचंड 18 सितंबर को बाबा रामदेव द्वारा संचालित पतंजलि योगपीठ का कारखाना देखने जाएंगे और उसी दिन स्वदेश लौट आएंगे। प्रधानमंत्री प्रचंड के दौरे की जमीन तैयार करने के लिए विदेशमंत्री प्रकाश शरण महात रविवार को नई दिल्ली रवाना हो गए। वह भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और अन्य मंत्रियों से मुलाकात करेंगे तथा उनसे दौरे के एजेंडे पर चर्चा करेंगे।