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समाज को साहित्य की अमूल्य थाती सौंप गये माधव दास

समाज को साहित्य की अमूल्य थाती सौंप गये माधव दास

लखनऊ। श्याम चरित मानस के रचनाकार माधव दास समाज को साहित्य की अमूल्य थाती सौंप गये। बिरहा और लोकगीतों के माध्यम से उन्होंने समाज में जागृति लाने का काम किया। पूर्वांचल में लोकगीत गाने वाले कलाकार हों या बिरहा गायक अधिकांश उनके ही शिष्य हैं।
कक्षा तीन तक पढ़ाई लिख डाली नौ खण्डों की श्याम चरित मानस
अवधी भाषा में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित श्याम चरित मानस की रचना करना आज के समय में आसान नहीं था। लेकिन माधव दास ने नौ खण्डों की श्याम चरित मानस की रचना की।
श्याम चरित मानस में 1100 दोहे, 1100 सोरठे और 11000 चैपाई है। इस कथा महाकाव्य में दोहों के बीच चैपाई की नौ लाइनें ही लिखी गयी हैं इसके पीछे उनका तर्क था कि भाव संख्या में नौ की सर्वोच्चता का रहा है। नौ संख्या का महत्व आदिकाल से चला आ रहा है इसी आधार से प्रकृति के नौ ग्रहों की तरंगों के आलोक में महाकाव्य को नौ तरंगों में तरंगित किया गया है। इस महाकाव्य में उत्पत्ति खंड,गोकुल खंड,वृंदावन खंड,माधुर्य खंड,मथुरा खंड,अनुराग खंड,द्वारिका खंड,धर्मनीति खंड और ब्रह्म खंड कुल मिलाकर नौ खण्ड हैं।
संजय यादव ने बताया कि उनके जाने से समाज की अपूर्णीय क्षति हुई है। उनकी त्रयोदशी संस्कार के मौके पर उनके पैतृक गांव बनमई में हजारों की संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन पर आजमगढ़ के पूर्व सांसद रमाकांत यादव,रूदौली विधायक राम चन्द्र यादव, अरून वर्मा पूर्व विधायक सुल्तानपुर सदर, पूर्व विधायक अनूप सांडा, विधायक अबरार अहमद, यादव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज बहादुर यादव, बिरहा गायक छविलाल पाल ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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