मुजफ्फरनगर दंगा: कोर्ट ने 7 आरोपियों को आजीवन कारावास और दो-दो लाख के जुर्माने की सजा सुनाई

मुजफ्फरनगर दंगा: कोर्ट ने 7 आरोपियों को आजीवन कारावास और दो-दो लाख के जुर्माने की सजा सुनाई

मुजफ्फरनगर। 2013 मुजफ्फरनगर दंगे में सभी 7 हत्यारोपियों को कोर्ट ने शुक्रवार को आजीवन कारावास एवं दो-दो लाख रुपए अर्थदंड अदा करने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि में से 80% मृतक सचिन और गौरव के परिजनों को मिलेगा। बता दें कि सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगे का कारण बने कवाल कांड के सभी सात अभियुक्तों को बुधवार को कोर्ट ने धारा 302 में दोषी करार दिया था। इस दौरान कचहरी में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था रही।

याद दिला दें कि वादी रविंद्र सिंह की के वकील अनिल जिंदल ने बताया कि कवाल में 27 अगस्त 2013 को बाइक से साइकिल टकराने के विवाद में भीड़ ने मलिकपुरा मजरे निवासी गौरव और सचिन की दिनदहाड़े मुख्य मार्ग पर निर्ममता से हत्या कर दी थी। मामले में गौरव के पिता रविंद्र सिंह की ओर से नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था। जांच के बाद विवेचनाधिकारी संपूर्णानंद तिवारी ने मुजम्मिल, मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर और नदीम के खिलाफ 24 नवंबर 2013 आरोपपत्र कोर्ट में दिया था।

बाद में वादी रविंद्र सिंह और अन्य गवाह के बयान के आधार पर कोर्ट ने दो अन्य अभियुक्त अफजाल तथा इकबाल को भी हत्यारोपी के रूप में तलब किया था। इस तरह से सात अभियुक्तों के खिलाफ छह फरवरी को सप्तम अपर सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई थी। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जितेंद्र त्यागी, अंजुम खान अब अशीष त्यागी व वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल जिंदल ने कुल दस गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर अली, कुंवरपाल सैनी व अन्य ने छह गवाहों के साक्ष्य कोर्ट में दिए।

सुनवाई के बाद सप्तम अपर सत्र न्यायालय के पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने सभी सात अभियुक्तों कवाल निवासी मुजम्ममिल व मुजस्सिम पुत्रगण नसीम, फुरकान पुत्र फजल, जहांगीर व नदीम पुत्रगण सलीम, अफजाल व इकबाल पुत्रगण बुंदू को गौरव व सचिन की हत्या के आरोप में आईपीसी की धारा 147, 148, 302/149 में दोषी ठहराया था। जानसठ क्षेत्र के गांव कवाल में 27 अगस्त 2013 को भीड़ के हमले में हुई गौरव-सचिन की हत्या का मामला प्रदेश की सत्तारूढ़ सपा की सरकार के कुछ फैसले सवालों के घेरे में आज भी हैं। इन्हीं फैसलों को लोग आज भी दंगे का कारण मानते हैं।

12 दिन में 12 फैसले आए सवालों के घेरे में

पहला फैसला

कवाल में गौरव-सचिन की हत्या के बाद बिना स्थिति पर नियंत्रण किए हुए लाश उठने से पहले डीएम सुरेंद्र सिंह, एसएसपी मंजिल सैनी और आईजी मेरठ जोन भावेश कुमार सिंह का तबादला शासन द्वारा करना।

दूसरा फैसला

गौरव सचिन की हत्या के मामले में अभियुक्तों को बचाने के लिए राजनैतिक दबाव में शाहनवाज की हत्या में घटना के करीब दस घंटे बाद गौरव व सचिन के परिजनों को भी शाहनवाज की हत्या में नामजद कर लेना।

तीसरा फैसला

कवाल कांड के अगले दिन 28 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर जिले को दोपहर बाद तक डीएम व एसएसपी विहीन कर देना, जिससे सचिन गौरव की अंत्येष्टि में गई भीड़ ने कवाल में आगजनी व तोड़फोड़ की।

चौथा फैसला

दो दिन के तनाव के बावजूद 29 अगस्त को कवाल में पर्याप्त फोर्स नहीं लगाना, जिससे भीड़ ने शिवमंदिर पर तोड़फोड़ की ओर दोनों पक्षों में जमकर पथराव से माहौल बिगड़ गया।

पांचवां फैसला

30 अगस्त 2013 को खालापार में आरोपी पक्ष को रैली करने देना और रैली के मंच पर पहुंचकर डीएम व एसएसपी द्वारा 31 अगस्त को नंगला मंदौड़ में गौरव सचिन की शोकसभा को प्रतिबंधित घोषित करना।