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अयोध्या विवाद पर सुनवाई, तय हो सकती है लगातार सुनवाई की तारीख

ayodhya mandir 00000 अयोध्या विवाद पर सुनवाई, तय हो सकती है लगातार सुनवाई की तारीख

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने वाली है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि कोर्ट में बुधवार को लगातार सुनवाई की तारीख तय हो सकती है। 8 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में लगातार सुनवाई की तारीख तय होने का अऩुमान था लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उन किताबों का का अनुवाद मांगा था जिनके अंश हिंदू पक्ष अपनी दलील में रख रहे थे। दोनों पक्षों ने एबीपी न्यूज को बताया है कि अनुवाद के दस्तावेज के लेन देन का काम पूरा हो चुका है।

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बता दें कि आठ फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में भी ऐसा माना जा रहा था कि लगातार सुनवाई की तारीख तय हो सकती है लेकिन उस दिन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने उन किताबों का अनुवाद मांग लिया, जिनके अंश हिन्दू पक्ष अपनी दलीलों के दौरान पढ़ेगा। इस मांग के चलते चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने सुनवाई टाल दी। कोर्ट ने हिन्दू पक्ष से कहा कि वो गीता, रामचरितमानस, पुराण, उपनिषद जैसे ग्रंथों के जिन हिस्सों को कोर्ट में रखना चाहता है, उनका अंग्रेज़ी अनुवाद मुस्लिम पक्ष को दे। दोनों पक्षों के वकीलों ने एबीपी न्यूज़ को बताया है कि दस्तावेजों के अनुवाद और लेन-देन का काम पूरा हो चुका है।

वहीं ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि या तो बुधवार बहस की औपचारिक शुरुआत होगी या नियमित सुनवाई को तारीख तय होगी। अब तक इस मामले को सुन रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में अगर कोर्ट अगर लगातार सुनवाई शुरू करता है तो मामले का फैसला सितंबर के अंत तक आ सकता है। मामले से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को देखते हुए कोर्ट ने कहा था, “ये मामला एक ज़मीन विवाद है, हम इसे उसी तरह देखेंगे। इस टिप्पणी के ज़रिए कोर्ट ने सभी पक्षों के वकीलों को ये संदेश दिया था कि वो कोर्ट में तथ्यों के आधार पर जिरह करें, भावनात्मक दलीलें न दें। मामला 7 साल से लंबित पड़ा है।

साथ ही 30 सितंबर 2010 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया था। हाई कोर्ट ने विवादित जगह पर मस्ज़िद से पहले हिन्दू मंदिर होने की बात मानी थी लेकिन ज़मीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाडा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने का आदेश दे दिया था। इसके खिलाफ सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, तब से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

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