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भारत छोड़ो और असहयोग आंदोलन से बापू ने कराया देश को आजाद, जानें और बहुत कुछ

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नई दिल्ली। पूरे देश में गांधी जयंती मनाई जा रहा है इसी को लेकर जगह-जगह चर्चायें भी हां रहीं हैं कि आखिर बापू जी की वजह से देश को आजादी कैसे मिली। कुछ ऐसे आंन्दोलनों के बारे में आपको बतायेंगे जिनकी वजह से बापू को आज भी उतने ही प्रासंगिकता के साथ याद किया जाता है जितने वो पहले थे।

असहयोग आंदोलन से कांप उठे थे अंग्रेज

महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन की वजह से पूरे देश में अंग्रेजों की स्थिति कमजोर होती चली गई। वर्ष 1920 से महात्मा गांधी व कांग्रेस के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन छेड़ा गया तो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई पहचान मिलने लगी। गांधी जी का मानना था कि ब्रिटिश हाथों में एक उचित न्याय मिलना असंभव है इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई और इस प्रकार असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई। देखते ही देखते देश के लोगों ने गांधी जी के कारवां को और भी मजबूत बना दिया।

भारत छोड़ो आंदोलन से टूट गई गोरों की हिम्मत

बापू जी के एक और आंदोलन यानी भारत छोड़ों आंदोलन को आज इतिहास के पन्नों में अमर माना जाता है और कहते हैं कि अंग्रेजों की हिम्मत इस नारे के साथ ही टूटनी शुरू हो गई। अगस्त 1942 में गांधी जी ने ”भारत छोड़ो आंदोलन” की शुरुआत के साथ एक सामूहिक नागरिक अवज्ञा आंदोलन ”करो या मरो” आरंभ करने का निर्णय लिया। इसके बाद से गोरों की एकता में कमजोरी दिखनी शुरू हुई।

दलित आंदोलन व नमक सत्याग्रह से ब्रिटिश राज पर बोला हमला

8 मई 1933 से देश में समानता लाने की लड़ाई शुरू हुई और नाम दिया गया दलित आंदोलन। जबकि गांधी जी ने अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना 1932 में की थी। आपको बता दें कि महात्मा गांधी नमक सत्याग्रह चलाकर पूरे देश की जनता को एकता के धागे में बांधने का कार्य किया। 12 मार्च, 1930 में अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाली, मार्च का संदेश था कि ब्रिटिश राज का एकाधिकार खत्म किया जाये।

इस प्रकार महात्मा गांधी के आंदालनों को आज भी याद किया जाता है और इसी के बल पर जनता ने महात्मा गांधी को बापू की संज्ञा दी थी। महात्मा गांधी को उनकी जीवन्तता के कारण अब पूरे विश्व में लोग अलग-अलग तरीके से याद करते हैं।

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