…जब भारत ने 1965 में पाकिस्तान को चटाई थी धूल

भारत-पाक के बीच 1965 में हुआ युद्ध सबसे भीषण और बड़ा टैंक युद्ध था, जिसका नेतृत्व कर रहे थे लेफ्टिनेंट कर्नल आरदेर्शि बुरजार जी तारापुर। उस युद्ध में स्थिति ऐसी बन गई थी कि भारतीय जवान निराश से होने लगे थे, कर्नल खुद गोली के शिकार हुए थे, सैनिको की हालत खस्ता थी। फिर भी कर्नल ने जवानों का हौसला बांधते हुए कहा कि यहां मरने से अच्छा है कि यह युद्ध करते हुए शहीद हों।

 

सेना और स्वयं की हालत बुरी होने के बावजूद कर्नल की सेना ने विरोधियों के करीब 60 टैंक ध्वस्त कर दिए थे और पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी, जिस प्रकार से लेफ्टिनेंट कर्नल ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे, ऐसे जवानो को पूरा देश नमन करता है।