बसपा ने फेंका मुसलमानों को लुभाने का दांव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के चुनावी रण के करीब आते ही अब आरोप प्रत्यारोप के दौर बढ़ते जा रहे हैं । प्रदेश में अगले साल चुनाव हैं ऐसे में हर एक पार्टी गठजोड़ की राजनीति में लगी है। इस जोड़तोड़ की राजनीति और भाजपा के साथ पुराने रिश्तों के ख्याल से राजनीतिक गलियारों में बसपा और भाजपा के भविष्य में गठबंधन होने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। लेकिन बीते शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मायावती के राइटहैंड कहे जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भविष्य में भाजपा से सरकार बनाने के लिए गठबंधन करने की सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।

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सिद्दीकी ने भाजपा पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ही समाजवादी पार्टी की जननी है। आज प्रदेश में भाजपा की मदद से सपा जनता को गुमराह कर रही है। ये दोनों दल वोटों की राजनीति के लिए सांप्रदायिकता को बढ़ावा देते हैं। इन बातों में कोई सच्चाई नहीं कि बसपा अब कभी भाजपा से सत्ता सुख की चाह में हाथ मिला ले। यह महज अफवाह है जो कि सपा फैलाकर मुसलमान मतदाताओं को गुमराह कर रही है। क्योंकि सपा को पता है कि बड़ी संख्या में मुसलमान मतदाता बसपा के साथ आ रहे हैं।

सिद्दीकी ने इस प्रकरण पर सपा और भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सपा और भाजपा दोनों मिली राजनीति करते हैं, बसपा शासन में जहां भाजपा कमजोर हुई थी तो वहीं सपा शासन में भाजपा मजबूती के साथ उभरी है। सपा सुप्रीमो खुद भाजपा के एहसानमंद हैं पहली बार विधायक भी भाजपा की मदद से बने थे। हमने भाजपा से गठबंधन जरूर किया था पर पार्टी के वसूलों और नीतियों से समझौता नहीं किया।

प्रदेश का मुसलमान भाई सपा और भाजपा के इस गंदे खेल को जान गया है। क्योंकि इस पिछले साढ़े चार साल से उसके साथ ये दोनों दल मिलकर ये सांप्रदायिकता का खेल खेल रहे हैं। इस लिए प्रदेश का मुस्लिम वर्ग अब अपने हितों और अपनी रक्षा के लिए बसपा के साथ मिलकर सांप्रदायिक शक्तियों को बढ़ावा देने वाले सपा और भाजपा के जुगलबंदी के तोड़ेगा।