किन्नरों ने पिंडदान कर शुरु की वर्षाें पुरानी परंपरा

वाराणसी। वाराणसी में आज किन्नरों ने वर्षों पहले के परंपरा की दोबारा शुरुआत कर दी। काशी में देशभर से आए किन्नरों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिशाच मोचन तीर्थ में पिंड दान कर सदियों पहले की अपनी परंपरा की फिर से शुरुआत की। उज्जैन किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में पिंडदान किया गया। आपको बता दें कि देश के इतिहास में पहली बार किन्नर समाज ने काशी के पिशाचमोचन कुंड पर अपनेे पूर्वजों का सामूहिक पिंडदान किया है, इस पिंडदान की प्रक्रिया में 21 ब्राह्मण शामिल हुए।

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झमाझम बारिश के बीच वाराणसी के पिशाच मोचन तीर्थ पर हजारों साल बाद किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर और महंत सभी ने एक साथ अपने पूर्वजों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया। किन्नरों ने पूरे विधि विधान के साथ पिंड दान किया और कहा कि महाभारत काल के बाद उन्हें पिंड दान करने का मौका मिला है और अब यह परंपरा हमेशा जारी रहेगी। इसके साथ ही किन्नर अखाड़े को आशीर्वाद देने आए स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए जो भी इस धरीती पर आया है उसे पिंड दान करना चाहिए। किन्नरों ने इस परंपरा को दोबारा से प्रारंभ किया है यह बहुत खुशी की बात है।

वाराणसी में किन्नरों के इस परंपरा के दोबारा प्रारंभ का लोगों ने भरपूर साथ दिया और किन्नरों के साथ दिया और उनके साथ खड़ी दिखी, इस अवसर पर लोगों का कहना था कि किन्नरों को भी वह सभी अधिकार प्राप्त होने चाहिए जो आम जनता को प्राप्त हैं।