ऐसे करें ‘करवाचौथ’ की पूजा…बने अखंड सौभाग्यवती

नई दिल्ली। आज देशभर में करवाचौथ का त्योहार मनाया जा रहा है। इस पर्व की कुछ खास बातें जानने के लिए भारत खबर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दर्शन एवं ज्योतिष के प्रोफेसर राजेश त्रिपाठी से फोन पर बात की। त्रिपाठी जी ने करवाचौथ से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर राजेश त्रिपाठी ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को ये त्योहार मनाया जाता है। इसके साथ ही इस पर्व के अंतर्गत शिव का पूरा परिवार जैसे कि पार्वती जी, शंकर जी, कार्तिकेय और गणेश जी की पूजा होती है। लेकिन चर्तुर्थी होने की वजह से मुख्य रुप से गणेश जी की पूजा की जाती है। इस पर्व का जिक्र सावित्री और यम के संवाद में भी होता है। जहां पर ऐसा कहा गया है कि वर की अक्षय आयु के लिए ये व्रत रखा जाता है जिसमें सौभाग्य, समृद्धि ,लक्ष्मी ,वैभव ये सारी चीजें समाहित होती है।

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पूजा का समय और चंद्रमा को देखने का महत्व:-

आज के दिन में पूजा का समय 5:48 मिनट से 7:02 मिनट तक आप पूजन कर सकते है और लगभग 8:52 मिनट पर चंद्रोदय काल है। ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा के दर्शन से शिव प्रसन्न होते हैं क्योंकि चंद्रखंड सोमार्धधारक भगवान शिव को बोला गया है। जैसा कि शिव के मस्तक पर चंद्रमा शोभामान है। इसीलिए चंद्रमा का दर्शन करने से पहले गणेश जी की पूजा कर ली जाती है। इसके साथ ही इस व्रत के बारे में रामतरितमानस में जिक्र किया गया है। ऐसी मान्यता है कि जब अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्या कर रहे होते हैं तो उनकी कुशलता के लिए द्रोपदी ने भी करवाचौथ के व्रत का अनुसरण किया था जिसके बाद उन्हें भी फल मिला था।

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व्रत में ध्यान रखने योग्य बातें:-

– भगवान गणेश के मंत्रों को उच्चारण करें।

– मन को शुद्द रखें।

-व्रत के दौरान सात्विक परंपरा का पूरी तरह से पालन करना फलदायी साबित होता है।

-रोहिणी नक्षत्र में करवाचौथ का संयोग लगभग 100 साल बाद आता है। इसमें चंद्रमा के दर्शन करने से ऐश्वर्य, सौहाद्र, पुरुषार्थ इत्यादि के लिए लाभप्रद होता है।

-पूजा में करवा मिट्टी या धातु दोनों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

-पूजन सामग्री में अपराजिता का पुष्प अत्यंत पूर्णदायक होता है।

rajesh-tripathi1 (राजेश त्रिपाठी, प्रोफेसर दर्शन एवं ज्योतिष, दिल्ली यूनिवर्सिटी)