रिवर फ्रंट घोटाला: CBI जांच के बाद अब इन आरोपियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति  

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट घोटाला मामले में बड़ी खबर सामने आई है। उत्‍तर प्रदेश शासन ने तत्‍कालीन एक्‍जीक्‍यूटिव इं‍जीनियर (अधिशासी अभियंता) रूप सिंह यादव के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।

सभी के खिलाफ अदालत में चलेगा मुकदमा

उत्‍तर प्रदेश शासन ने रूप सिंह यादव के साथ ही अन्‍य आरोपित अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। अब इन सभी के विरुद्ध अदालत में मुकदमा चलेगा। गौरतलब है कि गोमती रिवर फ्रंट के काम में भारी अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसकी जांच केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (CBI) कर रही है।

दरअसल, सीबीआइ ने रिवर फ्रंट मामले में जांच के बाद सिंचाई विभाग में लखनऊ खंड शारदा नहर के तत्कालीन अधिशासी अभियंता रूप सिंह यादव और अन्य कार्मिक को दोषी पाया। इसके बाद जांच एजेंसी ने शासन उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाए जाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी। अब शासन ने अभियोजन की अनुमति दे दी है। इस संबंध में आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक, प्रधान शाखा, सीबीआइ, एसीबी, लखनऊ को भेज दी गई है।

क्‍या है पूरा मामला?

आपको बता दें लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट के लिए पूर्व की समाजवादी सरकार में 1513 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। इस धनराशि में से 1437 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी मात्र रिवर फ्रंट का 60 फीसदी काम ही हुआ और 40 फीसदी काम अधूरा ही रहा। इस मामले में 2017 में सत्‍ता में आई योगी सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे।

इस मामले में आरोप है कि इस काम का ठेका डिफाल्टर कंपनी को देने के लिए रिवर फ्रंट टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया था। इस केस में जून, 2017 को थाना गौतमपल्ली में आठ इंजीनियर्स के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज किया गया था। वहीं, इस पूरे घोटाले मामले में पुलिस, सीबीआइ और ईडी मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही हैं।

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