उत्तराखंडः शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा

उत्तराखंडः शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा

उत्तराखंडः शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का बुधवार की सुबह से ही आगाज हो गया।जो कि नौं दिन तक रहेगा। शुरुआत से लेकर अंत तक पर्व में नौं दिन होते हैं। आज सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है। मंदिरों में  भक्त पूजा अर्चना कर रहे हैं। लोग नौ दिनों के मां के नौ रुपों की पूजा अर्चना करते हैं। माना जाता हैं  कि नौ दिनों तक पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामना पूरी होती है।

 

उत्तराखंडः शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा
उत्तराखंडः शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा

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जहां पूरा देश मां शारदा केी भक्ति में डूबने लगा है वहीं  अल्मोड़ा में भी दुर्गा पूजा की शुरुआत आज यानी कि नौं रात्रि के प्रथम दिन से हो गई है। नगर में 10 स्थानों पर मां दुर्गा की मूर्ती की स्थापना कर पूजा अर्चना शुरु हो गयी है। चौधानपाटा से सिद्धि नौला तक महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली, और मा के जयकारे लगाए। देवी पंडालों में मां के जयकारों की आवाजें गूंज रही हैं। बता दें कि नौ दिनों तक मां दुर्गा के पंडालों में भजन कीर्तन किये जायेंगे। बता दें कि नवरात्र की पूजा में क्या करें,क्या ना करें इसके लिए नीचे कुछ तरीके दिए गए हैं।

  • मां भगवती के 9 दिनों का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होंगी। यदि सामर्थ न हो तो पहले और आखिरी दिन उपवास करें
  • अपने घर के पूजा स्थान में दुर्गा, लक्ष्मी और मां सरस्वती फोटो की स्थापना करें और फूल चढ़ाएं
  • नौ दिन घर में मां दुर्गा के नाम की ज्योत जरूर जलाएं।
  • मां के मंत्र का स्मर्ण जरूर करें- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’
  • मां के 9 दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्‍य करें।
  • पूजा के दौरान मां दुर्गा को तुलसी दल और दूर्वा चढ़ाना न चढ़ाएं ऐसा गलत माना जाता है।
  • पूजन में हमेशा लाल रंग के आसन का उपयोग करना अच्छा रहेगा।आसन लाल रंग का और ऊनी होना चाहिए
  • पूजा के दौरान लाल वस्त्र पहनना शुभ होता है। वहीं इस दौरान लाल रंग का तिलक लगा भुभ होता है।
  • मां को सुबह शहद मिला दूध चढ़ाएं, पूजन के बाद इसे ग्रहण करने से आत्मा व शरीर शांति मिलेगी।
  • नवरात्र के आखिरी दिन घर में रखीं पुस्तकें,वाद्य यंत्रों, लेखिनी और अन्य पाठन सामग्री की पूजा करें

  निर्मल उप्रती