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कर्ज तले दबे जिन किसानों ने की थी आत्महत्या, आज उनकी पत्नियां बनी किसान आंदोलन का हिस्सा

women in farmers protest कर्ज तले दबे जिन किसानों ने की थी आत्महत्या, आज उनकी पत्नियां बनी किसान आंदोलन का हिस्सा

किसानों का आंदोलन आज 22वें दिन भी जारी है. सरकार को किसान संगठनों के बीच कोई सहमति नहीं बन पा रही है. किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की बात पर अड़ी हुई है. वहीं सरकार बातचीत के जरिये बीच का कोई रास्ता निकालना चाह रही है. किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अभी टल गई है. अदालत में किसी किसान संगठन के ना होने के कारण कमेटी पर फैसला नहीं हो पाया.

सुप्रीम कोर्ट ने आज क्या कहा?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि किसानों को प्रदर्शन का हक है, लेकिन ये कैसे हो इसपर चर्चा हो सकती है. अदालत ने कहा कि हम प्रदर्शन के अधिकार में कटौती नहीं कर सकते हैं. अदालत ने कहा कि प्रदर्शन का अंत होना जरूरी है, हम प्रदर्शन के विरोध में नहीं हैं लेकिन बातचीत भी होनी चाहिए. चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें नहीं लगता कि किसान आपकी बात मानेंगे, अभी तक आपकी चर्चा सफल नहीं हुई है इसलिए कमेटी का गठन जरूरी है. अटॉर्नी जनरल ने अपील की है कि 21 दिनों से सड़कें बंद हैं, जो खुलनी चाहिए. वहां लोग बिना मास्क के बैठे हैं, ऐसे में कोरोना का खतरा है.

बॉर्डर पर किसानों का नंबर बढ़ा
पहले दिन जितने किसान दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचे थे, अब उनकी संख्या उससे कहीं ज्यादा हो गई है. किसानों के साथ-साथ उनके कई समर्थक भी अब इस आंदोलन का हिस्सा बन चुके हैं.

जानकारी के मुताबिक, पंजाब से मंगलवार को करीब दो हजार महिलाएं 17 बसों और 10 ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवार होकर निकली थीं. ये महिलाएं वो हैं वो जिनके पति या बेटे ने खेती कर्ज के चलते आत्महत्याएं की. किसान आंदोलन में भी कई किसानों ने अपनी जान गवां दी है. वहीं इससे पहले भी देश में आए दिन कर्ज में डूबा किसान आत्महत्या कर अपना जीवन कुर्बान कर देता है और अपने परिवार को पीछे अकेला छोड़ जाता है.

इसी के चलते ये सभी महिलाएं किसान आंदोलन का हिस्सा बनने के लिये पहुंची हैं और बताना चाहती हैं कि इन कृषि कानूनों से छोटे परिवारों को सबसे ज्यादा खतरा है जिनके पास कम जमीन हैं.

फिलहाल प्रदर्शनकारी महिलाओं को टिकरी बॉर्डर से 7 किमी दूर उग्रहण समूह के ही कैंप में रखा गया है, जहां उन्होंने अपने दिवंगत किसान परिजनों की फोटो दिखाकर कृषि कानून का विरोध दर्ज कराया.

किसान आंदोलन में हिस्सा लेने आया संगरूर के जखपाल गांव के एक दिवंगत किसान के चार परिजन भी शामिल हैं. इनमें के दिवंगत किसान की पत्नी ने बताया कि 2007 में ही पति जुगराज सिंह को गंवा दिया था. गुरमेहर तब से ही गांव में अकेले रह रही हैं.

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