September 25, 2021 4:41 am
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भगवान श्री कृष्ण को क्यों लेना पड़ा इंसानी रूप में जन्म?

मथुरा

आज पूरे देशभर में भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन जन्माष्टमी के रूप में मनाया जा रहा है। हर किसी को नन्हें गोपाला के जन्म का इंतजार है। आज रात रोहिणी नक्षत्र का मुहूर्त है। ऐसे में आज भी जन्माष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की विधि विधान से पूजा की जाती है। मथुरा, द्वारिका, गोकुल में तो अष्टमी पर अलग ही धूम और आनंद होता है।

krishna 1 भगवान श्री कृष्ण को क्यों लेना पड़ा इंसानी रूप में जन्म?
बुधवार की रात 12.05 बजे से 12.47 बजे तक श्री कृष्ण की पूजा की जाएगी। वहीं, अगर रोहिणी नक्षत्र की बात करें तो इसकी शुरुआत 13 अगस्त को तड़के 03:27 मिनट से होगी और इसका समापन 05:22 मिनट पर होगा।लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान कृष्ण को क्यो धरती पर जन्म लेना पड़ा था। नहीं जनते है तो आज हम आपको इसके बारे में बताने जे रहे हैं।भगवान विष्णु के आठवें अवतार कान्‍हाजी ने धरती से पापों का बोझ नष्‍ट करने के लिए जन्‍म लिया था। रोहिणी नक्षत्र में अंधेरी काली रात में भाद्र मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को माता देवकी की कोख से कन्‍हैयाजी का जन्‍म हुआ था।

इस उपलक्ष्‍य में हम हर साल जन्‍माष्‍टमी का त्‍योहार मनाते हैं। भगवान कृष्ण ने देवकी और वसुदेव के घर जन्म लिया था।
वसुदेव-देवकी कोई साधारण मनुष्य नहीं थे। क्या आपको बता है जन्माष्टमी का व्रत करने से 1000 एकादशी व्रत करने का पुण्य प्राप्त होता है और उसके रोग, शोक, दूर हो जाते हैं। जन्माष्टमी का व्रत अकाल मृत्यु नहीं होने देता है। जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, उनके घर में गर्भपात नहीं होता। बच्चा ठीक से पेट में रह सकता है और ठीक समय पर बालक का जन्म होता है।”

जन्माष्टमी का महत्व
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का देशभर में विशेष महत्व है. यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। भगवान श्रीकृष्ण को हरि विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। देश के सभी राज्यों में इस त्योहार को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। इस दिन बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी अपने आराध्य के जन्म की खुशी में दिन भर व्रत रखते हैं और कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं. वहीं मंदिरों में झांकियां निकाली जाती हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु दिन भर व्रत रखतें हैं और अपने आराध्य का आशिर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। जन्माष्टमी का व्रत इस तरह से रखने का विधान है।

जो लोग जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें जन्माष्टमी से एक दिन पहले केवल एक वक्त का भोजन करना चाहिए।
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भक्त व्रत का संकल्प लेते हुए अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के खत्म होने के बाद पारण यानी कि व्रत खोलते हैं।

https://www.bharatkhabar.com/in-the-month-40-bjp-leaders-left-the-party/
माना जाता है भगवान श्री कृष्ण से इस दिन जो मांगो वो सब पूरा होता है।

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