लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बारे में क्यों नहीं खुलासा करती सरकार !

देश के कई महापुरुषों ने अपने प्राण भारत-माता के स्वाभिमान के लिए बलिदान किए हैं। लेकिन शांति की खोज में निकले मां भारती के लाल, लाल बहादुर शास्त्री का बलिदान विश्व के इतिहास में दर्ज एक रहस्य बना है। शांति का सपना आखों में सजोए शास्त्री, मैत्री और अमन के लिए पेशकश करते हुए मानवता के लिए बलिदान हुए थे।लाल बहादुर शास्त्री की मौत ताशकंद में हुई थी जिसके सही कारण का 46 वर्ष बाद भी रहस्य ही बना हुआ है।मौजूदा सरकार गोपनीयता एवं विदेशी संबंधों का की रक्षा की आड़ में कुछ भी खुलासा करने से मना कर रही है। जबकि परिवार के सदस्य रहस्य से पर्दा उठाने की मांग करते हैं।

 

लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बारे में क्यों नहीं खुलासा करती सरकार !
लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बारे में क्यों नहीं खुलासा करती सरकार !

इसे भी पढ़ेःवाराणसी में पीएम मोदी ने दी लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि

लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र एवं कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने कहा कि मेरी मां ‘ललिता’ को शुरू से ही संदेह था कि शास्त्री जी का निधन साधारण नहीं है। इस मामले की जांच में काफी समय लगा है। अनिल ने कहा कि अभी भी काफी कुछ किया जा सकता है, सच का खुलासा होना चाहिए।संदेह जताया कि उस समय शास्त्रीजी की देखरेख में लापरवाही की गई क्योंकि यह कैसे संभव है कि प्रधानमंत्री के कमरे में टेलीफोन और चिकित्सा सुविधा नहीं हो।उन्होंने कहा कि 70 के दशक में जनता पार्टी की सरकार ने आश्वासन दिया था कि सच सामने लाया जाएगा। लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री चरण सिंह ने उस समय कहा था कि ऐसे कोई प्रमाण नहीं है।

इसे भी पढ़ेःलाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य, और राजनैतिक जीवन

अनिल शास्त्री ने कहा कि इस मामले में आज की तारीख में शास्त्रीजी के साथ के कई लोग जीवित नहीं है। उनके चिकित्सक रहे डॉ.चुग के पूरे परिवार की दिल्ली के रिंग रोड में सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है।अनिल ने बताया  कि उनके (लाल बहादुर शास्त्री)  के  साथी मास्टर अर्जन सिंह और शास्त्रीजी के संयुक्त सचिव रहे सी.पी.श्रीवास्तव अभी जीवित हैं।जो अब विदेश में रहते हैं। श्रीवास्तव ने इस विषय पर एक पुस्तक ‘लाइफ ऑफ ट्रूथ इन पॉलिटिक्स’ लिखी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों में वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर भी शामिल हैं जो उनके साथ ताशकंद गए थे। उनको शास्त्रीजी के निधन की परिस्थितियों पर गंभीर संदेह है और इसका वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक में भी किया है।

शास्त्री की मौत के खुलासे से गोपनीयता और विदेशी संबंधों को खतरा.

सरकार का मामले के खुलासे को लेकर कहना है कि यह देश हित में नही  है। लेकिन वहीं शास्त्री परिवार का कहना है कि कम से कम दस्तावेजों का खुलासा तो होना चाहिए।गौरतलब है कि सूचना के अधिकार के तहत अनुज धर ने शास्त्री जी के निधन के बारे में जानकारी मांगी थी। सरकार से जानकारी नहीं मिलने के बाद अब अनुज धर ‘एंड दी सिक्रेसी डॉट कॉम ब्लॉग’ के माध्यम से अभियान चला रहे हैं।

मालूम हो कि 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह पाकिस्तान के साथ संधि करने गए थे। इस मामले में वहां उनकी सेवा में लगाए गए एक बावर्ची को हिरासत में लिया गया था। लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया था।

  महेश कुमार यादव