parliament attack लोकतंत्र के मंदिर को गंदा करने की पाक ने रची थी नापाक साजिश

नई दिल्ली। 13 दिसंबर 2001 को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए वो काला दिन है जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। इस दिन एक सफेद रंग की एंबेसडर गाड़ी ने संसद की लोहे की दरवाजों को तोड़ते हुए सदन में एंट्री कर ली। जिस वक्त ये गाड़ी सदन में एंट्री कर रही थी ठीक उसी समय संसद के दोनों सत्र लोकसभा और राज्यसभा स्थगित हो चुकी थी। पूरा सदन सांसदों से भरा हुआ था। सदन के स्थगित होते ही उपराष्ट्रपति घर जाने के लिए निकले ही थे कि एंबेसडर गाड़ियों से निकले और जब तक सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते आतंकियों ने गोली और ग्रेनेड बरसाना शुरू कर दिया।

इन आतंकवादियों ने 45 मिनट में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को गोलियों से छलनी करके पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया। इस हमले से ना सिर्फ भारत के लोकतंत्र के मंदिर को नुकसान हुआ बल्कि सभी देशवासियों की रूह को थर्रा दिया।

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अमूनन संसद भवन में आने वाली एंबेसडर गाड़ियों को कोई नहीं देखता है लेकिन उस दिन एक गाड़ी ने पूरा खेल बिगाड़ दिया। यह पूरी साजिश पाकिस्तान ने भारत के लोकतंत्र के मंदिर को नस्तेनाबूद करने के लिए रची थी। लेकिन दिल्ली पुलिस और भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने पाकिस्तान की साजिश पर पानी फेरते हुए  सभी आतंकियों को मार गिराया। आतंक के नापाक कदमों के निशानों को मिटाने में दिल्ली पुलिस के 5 जवान और सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल और संसद के दो गार्ड शहीद हुए।

पत्रकारों को कमरे में किया बंद

संसद में आतंकी हमले की जानकारी मिलते ही नेताओं को सेंट्रल हॉल तक ले जाने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने संवाददाताओं को एक कमरे में ले जाकर छुपा दिया। ये वही कमरा था जहां पर अहम सरकारी दस्तावेज बांटे जाते थे। कमरे में बंद होते ही जैसे ही संवाददाताओं ने फोन उठाए सभी फोन बंज थे। ये फोन हमला शुरू होने के तुरंत बाद ही काट दिए गए थे। मकसद ये कि कोई आतंकी संसद भवन के संचार तंत्र पर कब्जा ना कर ले।

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जब शहीदों को असली मायने में मिली श्रद्धांजलि

इस पूरी वारदात की साजिश रचने वाला शख्स था अफजल गुरू। संसद पर हमला करने की साजिश रचने के आरोप में भारत की सर्वोच्च न्यायलय ने उसे 4 अगस्त 2005 को फांसी की सजा सुनाई, लेकिन शहीद को असली श्रद्धांजलि 20 अक्टूबर 2006 को मिली जब अफजल को फांसी के तख्ते पर लटकाया गया।

Rani Naqvi
Rani Naqvi is a Journalist and Working with www.bharatkhabar.com, She is dedicated to Digital Media and working for real journalism.

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