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Cryptocurrency पर सरकार संसद में पेश करेगी बिल, आखिर है क्या ये करेंसी? आइए जानें

cryptocurrency 1559979587 Cryptocurrency पर सरकार संसद में पेश करेगी बिल, आखिर है क्या ये करेंसी? आइए जानें

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आजकल खूब चर्चा हो रही है। बिटक्वॉइन (Bitcoin) के एक क्रिप्टोकरेंसी है. इस आर्टिकल में हमको आप इसी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के बारे में विस्तार से बारे में बताएंगे। इसके हर पहलू से आपको रू-ब-रू कराएंगे, साथ ही बताएंगे कि इसका भारत में चलन है या नहीं, इसका भविष्य में इस्तेमाल कैसे होगा? क्रिप्टोकरेंसी की पूरी एबीसीडी के बारे में हमारे एक्सपर्ट क्षितिज पुरोहित ने हमें खुलकर बताया है।

आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में पेश होगा बिल 
मंगलवार को लोकसभा ने संसद के आगामी शीतकालीन सत्र के लिए तैयार की गई अपनी विधायी कार्य योजना की जानकारी सार्वजनिक की। इस कार्य योजना में 26 विधेयकों को पेश करने की बात कही गई है जिसमें से एक क्रिप्टो करेंसी और डिजिटल मुद्रा पर क़ानून बनाने का बिल भी दर्ज है। इस बिल को क्रिप्टो करेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2021 नाम दिया गया है।

लोकसभा ने अपनी कार्य योजना में बताया है कि इस बिल को लाने का उद्देश्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के निर्माण के लिए एक सुविधाजनक व्यवस्था तैयार करना और देश में सभी डिजिटल क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध लगाना है।
हालांकि इसमें आगे यह भी लिखा है कि यह बिल कुछ मामलों में राहत भी देता है जिसके तहत क्रिप्टो करेंसी की तकनीक और उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है।

क्रिप्टो करेंसी बिल पर सरकार की चुप्पी
आरबीआई काफ़ी समय से अपनी डिजिटल करेंसी जारी करने की दिशा में सोच रहा है लेकिन यह अभी तक तय नहीं है कि इसका पायलट प्रॉजेक्ट कब तक शुरू होगा। अभी तक इस बिल की सटीक रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही इस पर कोई सार्वजनिक तौर पर विचार-विमर्श हुआ है। वित्त मंत्रालय काफ़ी समय से इस बिल पर कुछ नहीं बोल रहा है और ऐसा माना जा रहा है कि यह बिल अगस्त से ही मंत्रिमंडल की अनुमति के लिए तैयार है।
इस बिल को लेकर काफ़ी सवाल जुड़े हुए हैं क्योंकि क्रिप्टो करेंसी में काफ़ी लोगों का निवेश है अगर सरकार सभी क्रिप्टो करेंसी को प्रतिबंधित कर देती है तो उन लोगों का क्या होगा जिन्होंने निवेश किया हुआ है। हालांकि, मोदी सरकार का उद्देश्य इन डिजिटल करेंसी को लेकर कुछ और भी है।
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ बीती 13 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिप्टो करेंसी पर नियम बनाने को लेकर एक बैठक की थी जिसमें केंद्रीय बैंक, गृह और वित्त मंत्रालय के आला अधिकारी शामिल हुए थे। इस बैठक के दौरान यह सहमति बनी है कि ‘बड़े-बड़े वादों और ग़ैर-पारदर्शी विज्ञापनों से युवाओं को गुमराह करने की कोशिशों’ को रोका जाए। इसी दौरान यह भी पाया गया कि अनियंत्रित क्रिप्टो मार्केट मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फ़ंडिंग के लिए इस्तेमाल हो सकती है। इसी कारण सरकार इस क्षेत्र के लिए तेज़ी से क़दम उठाने को दृढ़ संकल्प है।

क्रिप्टो करेंसी में आई भारी गिरावट
मंगलवार को जैसे ही क्रिप्टो करेंसी से जुड़े बिल की जानकारी सामने आई तो इस बाज़ार में भारी गिरावट देखी गई। सभी प्रमुख क्रिप्टो करेंसी में लगभग 15 फ़ीसदी या उससे अधिक की गिरावट देखी गई हैय़ बिटकॉइन में 17 फ़ीसदी से अधिक, एथेरियम में लगभग 15 फीसदी और टीथर में लगभग 18 फीसदी की गिरावट हुई है।

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी?
Cryptocurrency दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है। Crypto जोकि लैटिन भाषा का शब्द है जो cryptography से बना है और जिसका मतलब होता है, छुपा हुआ/हुई। जबकि Currency भी लैटिन के currentia से आया है, जो कि रुपये-पैसे के लिए इस्तेमाल होता है। तो क्रिप्टोकरेंसी का मतलब हुआ छुपा हुआ पैसा या गुप्त पैसा या डिजिटल रुपया। कैपिटल वाया ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड के इंटरनेशनल एंड कमोडिटीज रिसर्च के लीड और क्रिप्टोकरेंसी पर गहरी पकड़ रखने वाले क्षितिज पुरोहित (Kshitij Purohit) बताते हैं कि आमतौर पर क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है, जिसे आप छू तो नहीं सकते। लेकिन रख सकते हैं. यानी यह मुद्रा का एक डिजिटल रूप है। यह किसी सिक्के या नोट की तरह ठोस रूप में आपकी जेब में नहीं होता है। यह पूरी तरह से ऑनलाइन होता है।

इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए कि हर देश की अपनी मुद्रा है। जैसे कि भारत के पास रुपया, अमेरिका के पास डॉलर, सउदी अरब के पास रियाल, इंग्लैंड के पास यूरो है। हर देश की अपनी-अपनी करेंसी हैं। यानी एक ऐसी धन-प्रणाली जो किसी देश द्वारा मान्य हो और वहां के लोग इसके इस्तेमाल से जरूरी चीजें खरीद सकते हों। यानी जिसकी कोई वैल्यू हो, करेंसी (Currency) कहलाती है।

किसने बनाई और क्यों बनाई?
इस बारे में क्षितिज बताते हैं कि बहुत सारे लोग मानते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी 2009 में सतोशी नाकामोतो ने शुरू किया था, लेकिन ऐसा नहीं है। इससे पहले भी कई निवेशकों ने या देशों ने डिजिटल मुद्रा पर काम किया था। यूएस ने 1996 मुख्य इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड बनाया था, ऐसा गोल्ड जिसे रखा नहीं जा सकता था, लेकिन इससे दूसरी चीजें खरीदी जा सकती थीं। हालांकि 2008 इसे बैन कर दिया गया. वैसा ही 2000 की साल में नीदरलैंड ने पेट्रोल भरने के लिए कैश को स्मार्ट कार्ड से जोड़ा था।

Bitcoin सबसे महंगी Virtual Currency
आसान भाषा में कहें तो क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल कैश प्रणाली है, जो कम्प्यूटर एल्गोरिदम पर बनी है। यह सिर्फ डिजिट के रूप में ऑनलाइन रहती है। इस पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। शुरुआत में इसे अवैध करार दिया गया था। लेकिन बाद में Bitcoin की बढ़ती लोकप्रियता के चलते इसे कई देशों में लीगल कर दिया गया है। कुछ देश तो अपनी खुद की क्रिप्टोकरेंसी ला रहे हैं. Bitcoin दुनिया की सबसे महंगी वर्चुअल करेंसी है।

कैसे काम करती है Cryptocurrency?
पिछले कुछ सालों से क्रिप्टोकरेंसी मुद्राओं की लोकप्रियता बढ़ी है। इन्हें ब्लॉकचेन सॉफ़्टवेयर के ज़रिए इस्तेमाल किया जाता है। ये डिजिटल मुद्रा इनक्रिप्टेड यानी कोडेड होती हैं। इसे एक डिसेंट्रेलाइज्ड सिस्टम के जरिए मैनेज किया जाता है। इसमें प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल सिग्नेचर द्वारा वेरिफिकेशन होता है। क्रिप्टोग्राफी की मदद से इसका रिकॉर्ड रखा जाता है। क्षितिज बताते हैं कि इसके जरिए खरीदी को क्रिप्टो माइनिंग (Cryptocurrency Mininig) कहा जाता है क्योंकि हर जानकारी का डिजिटल रूप से डेटाबेस तैयार करना पड़ता है. जिनके द्वारा यह माइनिंग की जाती है, उन्हें माइनर्स कहा जाता है।

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