क्या है बूस्टर डोज, वैक्सीनेशन के बाद इसको लगाने की क्यों चल रही बात

लखनऊ: देशभर में इन दिनों कोरोना से निपटने के लिए वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है। 18 वर्ष से ऊपर के लोगों का भी टीकाकरण शुरू है, इसी बीच बूस्टर डोज का भी जिक्र शुरू हो गया है। कुछ लोगों का कहना है कि दोनों डोज लगाने के बाद बूस्टर डोज भी इस्तेमाल में लाई जा सकती है।

दुनिया भर में पौने दो अरब लोगों का टीकाकरण

दिसंबर 2020 में सबसे पहले एक महिला को कोरोना का टीका लगाया गया था। इसके बाद तेजी से वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को शुरू किया गया। भारत में भी इस पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हालांकि ज्यादा जनसंख्या होने के कारण अभी बहुत कम प्रतिशत तक वैक्सीन पहुंच पाई है। लेकिन भारत सरकार दिसंबर 2021 तक सभी को वैक्सीन लगाने की बात कह रही है।

बूस्टर डोज की जरूरत क्यों

अगर कोई व्यक्ति कोरोना का टीकाकरण पूरा कर ले रहा है, इसके बाद बूस्टर डोज की आवश्यकता है या नहीं यह एक बड़ा सवाल है ? दरअसल यह वायरस समय समय पर अपना रूप बदल रहा है, इसीलिए वैक्सीन की कारगर क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में यही वैक्सीन कब तक शरीर में संक्रमण फैलने से रोक पाएगी यह नहीं कहा जा सकता। इसीलिए बूस्टर डोज भी लगाने की मांग उठी है।

हालांकि इस पर अभी कोई अधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। जानकारों का कहना है कि अगर संक्रमण का नया वैरियंट आता है तो वैक्सीन कमजोर पड़ने पर बूस्टर डोज भी एक विकल्प हो सकता है। फाइजर जैसी बड़ी कंपनियां बूस्टर डोज पर काम कर रही हैं। वहीं भारत में भी सरकार ने भारत बायोटेक को तीसरी डोज के ट्रायल की अनुमति दे दी है। तीसरी डोज अतिरिक्त इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार साबित होगी, इससे नए वेरिएंट का भी सामना शरीर कर पाएगा।

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