पानी की कमी के चलते ग्रामीणों को मीलों पैदल चलकर लाना होता है यहां पानी

सतना। इन दिनों पूरे उत्तर भारत में गर्मी से लोगों का बुरा हाल है। पारा दिन बा दिन चढ़ता जा रहा है। वहीं अब मध्यप्रदेश के सतना जिले में लोगों को पानी की कमी से भी दो चार होना पड़ रहा है। हालते तस्वीर कुछ ऐसी है, कि लोगों को पीने का पानी भी नहीं पूरा मिल रहा है।

पानी के किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण

यूं तो कहने के लिए इस इलाके में बोरवेल और कूंए सब कुछ हैं। लेकिन प्रचंड गर्मी और सरकारी तंत्र की ऐसी व्यवस्था है कि अब इस क्षेत्र के लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों में खर्च होने वाले पानी के लिए रोज कम से कम 3 से 4 किलोमीटर जाना पड़ रहा है।

स्थानीय इलाकों में रामनगर खोखला, टिकुरी टोला, पद्मैनिया और दबरी के लोगों का कहना है कि सरकार की तरफ से केवल कागजों में ही  टैंकर यहां आता हैं। वास्तविकता तो यहां की कुछ और ही कहानी बताती है। इलाकाई लोगों का कहना है कि हर साल कुछ सी मौते दूषित जल की वजह से होती हैं। यहां पर पानी की कमी जैसी भयावह स्थिति के चलते लोगों को कई किलोमीटर पैदल चल कर लाना पड़ रहा है।

स्थानीय प्रशासन लगा व्यवस्था सुधारने में

स्थानीय प्रशासन की ओर पर इस भयावह स्थिति के बाद अब कहा जा रहा है कि 2  टैंकर नियमित तौर पर यहां पर पानी की सप्लाई के लिए नियुक्त कर दिए गए हैं। लेकिन गांव की जनसंख्या और प्रशासनिक इंतजामों का कोई मेल नहीं खा रहा है। जिले के डिप्टी कलेक्टर ओम नारायण सिंह ने इस बावत बातचीत कर मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा है कि गर्मी के चलते बोरवेल रूख गए हैं। ऐसे में ग्रामीणों के लिए तुरंत ही पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की बात कही है। इसके साथ ही इलाके में नए हैण्डपम्मों की व्यवस्था की जा रही है।

देश के कई हिस्सों में पानी की कमियां व्याप्त हैं। देश के शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी की समस्य़ा एक जैसी है। यहां के कई जिलों में तापमान में हुई असमान्य वृद्धि के बाद अचानक ही जलस्तर का नीचे गिर जाना इस भयावह होती स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।