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गोवर्धन: 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, ज्ञान यज्ञ में बह रही भक्ति की धारा

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अमित गोस्वामी, संवाददाता

गोवर्धन में परिक्रमा मार्ग संत आश्रम विश्व कल्याण सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भक्ति की धारा बह रही है। भगवान वेंकटेश्वर के पाठोत्सव के उपलक्ष्य में भागवत कथा में रामनुज पीठ के पीठाधीश्वर रामनुजाचार्य देवकी नंदन आचार्य ने बताया कि वेंकटेश्वर भगवान विष्णु के अवतार हैं।

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गोवर्धन: 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

गोवर्धन में परिक्रमा मार्ग संत आश्रम विश्व कल्याण सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भक्ति की धारा बह रही है। भगवान वेंकटेश्वर के पाठोत्सव के उपलक्ष्य में भागवत कथा में रामनुज पीठ के पीठाधीश्वर रामनुजाचार्य देवकी नंदन आचार्य ने बताया कि वेंकटेश्वर भगवान विष्णु के अवतार हैं। प्रभु विष्णु ने कुछ दिनों के लिए तिरूमला स्थित स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे निवास किया है। वेंकट पहाड़ी के निकट होने के कारण भगवान विष्णु को वेंकटेश्वर कहा जाने लगा।

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विष्णु के अवतार हैं भगवान वेंकटेश्वर

वहीं यहां चल रही भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। आचार्य देवकीनंदन महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के चैथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को कथा व्यास महाराज श्री ने बेहद संजीदगी के साथ सुनाया।

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वेंकटेश्वर भगवान के पाठोत्सव में बही भक्ति की धारा

उन्होंने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा का संगीतमयी वर्णन सुन श्रद्धालुगण झूमने लगे। इस अवसर पर रामानुजाचार्य  देवकीनंदन आचार्य जी महाराज,  ट्रस्टी सचिव गोपाल राय, मुनीराम खारी, केके शर्मा, संग रक्षक प्रज्वल गोपाल उपाध्याय आदि थे।

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