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पंडित गया प्रसाद जी महाराज: भक्ती की मिसाल, गिरिराज की तलहटी में झाड़ू लगाते गुजार दिए थे 65 साल

WhatsApp Image 2021 11 10 at 8.31.21 PM 1 पंडित गया प्रसाद जी महाराज: भक्ती की मिसाल, गिरिराज की तलहटी में झाड़ू लगाते गुजार दिए थे 65 साल

fdfadfsdfs 1 पंडित गया प्रसाद जी महाराज: भक्ती की मिसाल, गिरिराज की तलहटी में झाड़ू लगाते गुजार दिए थे 65 साल   अमित गोस्वामी, मथुरा

परम संत पंडित गया प्रसाद जी महाराज का जन्मोत्सव लक्ष्मी नारायण मंदिर में धूमधाम से मनाया गया। गोवर्धन में उनके जन्मोत्सव पर लक्ष्मी नारायण मंदिर में कई धार्मिक आयोजन किए गए। कहीं श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मंचन हुआ तो सुर संगीत से बाबा महाराज का गुणगान भी किया गया।

 

धूमधाम से मनाया गया पंडित गया प्रसाद जी महाराज का जन्मोत्सव

परम संत पंडित गया प्रसाद जी महाराज का जन्मोत्सव लक्ष्मी नारायण मंदिर में धूमधाम से मनाया गया। गोवर्धन में उनके जन्मोत्सव पर लक्ष्मी नारायण मंदिर में कई धार्मिक आयोजन किए गए। कहीं श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मंचन हुआ तो सुर संगीत से बाबा महाराज का गुणगान भी किया गया। हनुमान बाग के महंत सियाराम दास जी ने पूजा अर्चना कर बाबा के जीवन से लोगों को अवगत कराया। ब्रजभूमि की रहनी और श्रीकृष्ण की भक्ति कैसे की जाती है, यह जानना हो तो संत गया प्रसाद जी का जीवन इसका उदाहरण है।

कृष्ण-कन्हैया से अलौकिक भक्ती बेमिसाल

ब्रज संत शिरोमणि पंडित गया प्रसाद महाराज की कृष्ण-कन्हैया से अलौकिक भक्ति बेमिसाल रही है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम 65 साल गिरिराज की तलहटी में झाड़ू लगाते हुए गुजार दिए। इस दौरान उनके मुख से नंदलाल के नटखट अंदाज की कथाएं सुन लोग भावविह्वल हो उठते थे। वहीं संत गया प्रसाद जी की सेवा में रहे महंत सियाराम दास ने बताया कि साल 1936 में पं. गया प्रसाद जी श्रावण के अधिमास में गोवर्धन की परिक्रमा के लिए गए और फिर यहीं गिरिराज की सेवा में लीन हो गए। वैराग्य तो पहले ही धारण कर चुके थे, यहां उन्होंने महात्मा वेश धारण कर पूर्ण विरक्ति को अंगीकार कर लिया। वहां राधाकुंड के पास मिर्ची बाबा की बगीची में रहने लगे। ब्रज वासियों से भिक्षा कर वे भक्ति योग के अनुष्ठान में जुट गए।

WhatsApp Image 2021 11 10 at 8.31.21 PM 2 पंडित गया प्रसाद जी महाराज: भक्ती की मिसाल, गिरिराज की तलहटी में झाड़ू लगाते गुजार दिए थे 65 साल

गिरिराज की तलहटी में झाड़ू लगाते गुजार दिए थे 65 साल

महंत सियाराम दास ने बताया कि नित्य गिरिराज की परिक्रमा का भी उनका नियम लिया और यह शरीर में साम‌र्थ्य रहने तक निभाया। कुछ समय बाद गोवर्धन में दानघाटी के पास लक्ष्मीनारायण मंदिर के एक कमरे में रहकर पंडित जी ने अपना जीवन गिरिराज की तलहटी मे झाड़ू लगाने और अपने लाड़ले बालकृष्ण की लीलाओं में निमग्न रहते हुए व्यतीत किया। पं.गया प्रसाद की त्याग, तपस्या का सुयश सर्वत्र फैला। बगैर दंड और गेरुआ वस्त्र के संन्यासी, किसी भी संप्रदाय के छापा-तिलक के बगैर ही परम वैष्णव गया प्रसाद ब्रजवासियों के गिरिराज वारे बाबा हो गए।

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अंतिम समय में भी गिरिराज से अलग नहीं हुए महाराज

महंत सियाराम दास ने कहा कि पंडित जी ने गिरिराज को न छोड़ने का संकल्प ले रखा था। वे ब्रज रज की चंदन लगाते थे और बालकृष्ण को ही अपना इष्ट मानते थे। यह कारण था कि देश की अप्रतिम विभूतियां स्वामी करपात्री जी महाराज, गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ, स्वामी अखंडानंद सरस्वती, पं. रामकिंकर महाराज खुद चलकर पंडित जी के पास पहुंचते थे। उन्होंने बताया कि करीब 101 साल की अवस्था में गुरुपूर्णिमा के दिन पं. गया प्रसाद अस्वस्थ हुए। इस दौरान उनके अनुयायियों ने इलाज के लिए बाहर ले जाने की कोशिश भी की, लेकिन पंडित जी की गिरिराज को न छोड़ने की प्रतिज्ञा आड़े आ गई। कुछ दिन बाद ही भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्थी को पंडित जी गिरिराज की पावन तलहटी दानघाटी में अपने ही जीवन धन प्रियतम प्रभु की नित्य लीला में लीन हो गए। वहीं अब बाबा के नाती पंडित रामजीवन जी सेवा में संपूर्ण रूपी आत्मा के प्रेम से लगे हुए हैं।

 

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