September 17, 2021 7:14 am
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आज़ादी की गवाह है अल्मोड़ा की ऐतिहासिक जेल, आज मिटने की कगार पर है स्वतंत्रता सेनानियों की यादें!

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आज हम भले की खुली हवा में सांस ले रहे हों लेकिन देश को को आज़ाद कराने में हज़ारो स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन की आहुति दी है उसे भुलाया नहीं जा सकता। आज भी उन स्वतंत्रता सेनानियों के हौसले और हिम्मत की गवाही देती है उत्तराखंड के अल्मोड़ा की ऐतिहासिक जिला जेल।

अल्मोड़ा की ऐतिहासिक जेल की हालत खस्ता

अल्मोड़ा की जिला जेल आजादी के इतिहास से जुड़ी हुई है। यह अंग्रेज़ों के जुल्म की गवाह रही है। आज़ादी के दीवानों में जननायक पंडित जवाहर लाल नेहरू, भारत रत्न गोविन्द बल्लभ पंत, फ्रन्टियर गांधी खान अब्दुल, गप्फार खान, हर गोविन्द्र पंत, विक्टर मोहन जोशी, बद्रीदत्त पांडये, सुश्री सरला बहन, आचार्य नरेंद्र देव, चन्द्र सिंह गढ़वाली, कामरेड पूर्ण चंद जोशी, गोबिंद चरणकर,  मोहन लाल साह, दुर्गा सिंह रावत सहित अनेक स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों ने इस ऐतिहासिक जेल की काल कोठरियों में दिन गुज़ारे हैं। यहां महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भी रखा गया था। अल्मोड़ा की यह ऐतिहासिक जेल 1872 में बनाई गई थी। जिसमें आजादी के अनेक वीरों को यहां रखा गया था। यह जेल उत्तराखंड की सबसे पुरानी जेलों में शुमार है। इस जेल में पंडित जवाहर लाल नेहरू दो बार रहे हैं।

जेल में संजोकर रखी गई हैं ऐतिहासिक यादें

स्वतन्त्रता संग्राम से जुड़ी हुई अनेक ऐतिहासिक यादे आज भी इस जेल में संजो कर रखी गई हैं। जिन्हें देख कर आज भी सब कुछ जीवंत हो उठता है। इसी जेल में पं.जवाहर लाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा के कुछ अध्याय भी लिखे थे। जेल के एक सेक्शन में स्वतन्ता संग्राम के सेनानियों की अनेक यादों को संरक्षित करके रखा गया है। जिनमें उनके खाने के बर्तन, चरखा, दीपक सहित पुस्तकालय भवन हैं।

जीर्ण-क्षीर्ण होती जेल, दफ़न हो जायेगा आज़ादी का इतिहास!

अगस्त क्रान्ति की गवाह रही अल्मोड़ा की यह जेल जीर्ण-क्षीर्ण होती जा रही है। ऐतिहासिक यादों को समेटे हुए इस जेल को संरक्षित किए जाने की की ज़रुरत है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो किसी दिन हमारा यह आज़ादी का इतिहास दफ़न हो जायेगा। अल्मोड़ा की इस ऐतिहासिक जेल में अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चम्पावत जनपदों के कैदियों को रखा जाता है। यहां कैदियों की संख्या लगातार बढ़ने से भी इस जेल की हालत खस्ता होती जा रही है। आजादी के दौर की गवाह रही यह जेल इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

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