पशुपालन विकास में अग्रणी उत्तराखंड सरकार, “सुंदरम” की मेहनत लाई रंग

देहरादून। सूबे में हर विभागों ने बीते 1 साल की विकास की सरकार में कई महत्वपूर्ण कामों का अन्जाम दिया है। जिससे सूबे में विकास की एक नई इबारत लिखी गई है। इसी सन्दर्भ में भारत खबर की टीम ने पशुपालन विभाग का जायजा लिया। पशुपालन विभाग के सचिव आर.मिनाक्षी सुन्दरम् से इस बार में कई महत्वपूर्ण जानकारियां ली गई। उन्होने बताया कि विभाग ने किस तरह से प्रदेश में किसानों और चरवाहों के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य कर उनके आय के साधनों की वृद्धि के लिए योजनाएं संचालित की हैं।

बद्री गाय को लेकर उठाए गए महत्वपूर्ण कदम
पुशपालन विभाग में डेयरी को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। जिसमें यहां पर पहाड़ पर पाई जाने वाली बद्री गाय को लेकर हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जैसे इसकी नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ाने को लेकर विभाग द्वारा कई तरह से उन्नत नस्लों के जरिए ब्रीड़िंग का काम किया जा रहा है। अभी हम लगातार इनके दूध उत्पादन की क्षमता को देख रहे हैं। यह प्रयोग तकरीबन 1000 गायों पर किया जा रहा है। इसके बाद इनकी ब्रीड़िंग का काम किया जाएगा। जिससे आने वाले समय पर प्रदेश की बद्री गाय की नस्ल को सुधारा जा सकेगा।

इसके साथ ही हम ऐसी ट्रैक्नोलॉजी जिसका प्रयोग पश्चिम के देशों में पशुपालन के लिए किया जाता है। जिससे बछडे की जगह ज्यादा तर बछिया पैदा हो । इसका ट्रायल किया जा चुका है, इसके लिए केन्द्र सरकार के पास हमने प्रस्ताव भी भेजा है , जो कि अन्तिम चरण में है। इसके साथ ही अब इसको भी पशुपालन विभाग में जोड़ सकेंगे। जिससे प्रदेश में उन्नत किस्म की बछिया या गाय मिल सकेगी। इसके लिए विभाग ने टेण्डरिंग भी कर ली है। जल्द ही यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड में शुरू हो सकता है।

भेड़ और बकरियों के पालन को लेकर पायलट प्रोजेक्ट
इसके साथ भेड़ और बकरियों के सन्दर्भ में भी पशुपालन विभाग राष्ट्रीय सहकारी विकास परिषद के तहत प्रदेश में आने वाले प्रोजेक्ट में इसे जोड़ा है। इसके तहत किसानों को 50 बकरियां और दो बकरे दिए जाएंगे । जिसके वो पालेंगे विभाग द्वारा गढ़वाल और कुमाऊं मण्डल में दो स्लाटर हाऊस तैयार किए जाएंगे । पालने के समय ही विभाग द्वारा इनके प्रजनन से लेकर वृद्धि तक हाईजिन मीट के लिए इनको उपलब्ध कराया जाएगा। जिससे किसानों को भेड़ और बकरी पालन में बेहतर आय प्राप्त हो सकेगी। इसके लिए 3 स्तर पर सोसाइटी बनाई गई है। प्राथमिक स्तर, जिला स्तर और राज्य स्तर पर बनाई गई सोसायटी द्वारा ही इनका पोस्टमार्टम कर इसे हाइजीनिक तौर पर प्रमाणित किया जाएगा। जिससे विभाग द्वारा एक ब्रॉण्ड भी प्रदान करने के साथ इसके प्रचार प्रसार की भी योजना विभाग द्वारा तैयार की गई है। इस प्रोजेक्ट में मिलने वाले लाभांश को किसानों के साथ शेयर भी किया जाएगा।

कैटिल की क्षमता को बढ़ाने के लिए बीते साल में विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। जिनमें विभाग ने लोगों को पशुओं का प्रजनन बढ़ाने के लिए टारगेट दिया साथ ही लोगों को प्रोत्साहित भी किया। वैक्सीनेशन में भी विभाग ने बीते साल की अपेक्षा शत प्रतिशत अपनी क्षमता बढाई है।

 

अजस्र पीयूष