September 17, 2021 8:11 pm
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उत्तराखंड को नशा मुक्त प्रदेश घोषित किया जाए: पूर्व पीसीसी चीफ किशोर उपाध्याय

cm rawat 2 उत्तराखंड को नशा मुक्त प्रदेश घोषित किया जाए: पूर्व पीसीसी चीफ किशोर उपाध्याय

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा विधानसभा पर आयोजित धरने को संबोधित करते हुए पूर्व पीसीसी चीफ किशोर उपाध्याय ने कई तरह क प्रस्ताव रखे हैं। जिनमें उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को नशा मुक्त प्रदेश घोषित किया जाए और हर प्रकार के नशे पर देवभूमि में प्रतिबंध लगाया जाए। उत्तराखंड के निवासियों के जंगलों और प्राकृतिक साधनों पर यहां के लोगों के हक-हकूक बहाल किये जाए और उनमें बनाधिकार आंदोलन के सभी बिंदुओं को शामिल किया जाए। इसके अलावा भी उन्होंने और कई बिंदुओं पर नज़र डाली जो इस प्रकार है…

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1- पर्वतीय एवं मैदानी अंचलों में वन्य जीवों द्वारा किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान की सम्पूर्ण क्षतिपूर्ति भारत सरकार द्वारा मुवावजे के रूप में दी जाय। वन्य जीवों द्वारा किसी भी मानव हानि के एवज में पीड़ित परिवार को रु० 25 लाख का मुवावजा एवं मृतक के परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार द्वारा सरकारी नौकरी दिये जाने का प्राविधान किया जाय।

2- उत्तराखंड राज्य निर्माण संघर्ष समिति द्वारा राज्य आंदोलन के दौरान राज्य के मूल निवासियों को केंद्र सरकार व राज्य सरकार में नौकरी में आरक्षण देने की प्रथम मांग को भारत सरकार द्वारा लागू किया जाय।

3- उत्तराखंड राज्य में वन अधिकार अधिनियम 2006 को यथाशीघ्र लागू करते हुए उत्तराखंड राज्य को वन प्रदेश घोषित करने के साथ साथ राज्य के नागरिकों को वनवासी का दर्जा दिया जाये। उत्तराखंड राज्य के निवासियों को पीढी दर पीढ़ी से पर्यावरण की रक्षा की एवज में प्रति परिवार प्रतिमाह एक गैस सिलेंडर तथा 100 यूनिट बिजली मुफ्त उपलब्ध करायी जाये।

4- उत्तराखंड राज्य के निवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु हिमालय क्षेत्र में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों के दोहन का अधिकार स्थानीय समुदाय को दिया जाये तथा राज्य के हर परिवार को आवासीय भवन के निर्माण हेतु लकड़ी, पत्थर, रेत, बजरी आदि निशुल्क उपलब्ध करायी जाये। वन प्रबंधन एवं वनों की सुरक्षा के अधिकार स्थानीय समुदाय को दिये जाए।

5- उत्तराखंड की जल सम्पदा पर उत्तराखंड राज्य का अधिकार देने के साथ साथ केंद्र सरकार से ग्रीन बोनस के रूप में उत्तराखंड को प्रतिवर्ष 10000 हजार करोड़ रुपये की धनराशि दी जाए।

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