December 10, 2022 2:20 pm
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3500 किलोमीटर की यात्रा पर निकली शिप्रा,नदी स्वच्छता की जगाएगी अलख

शिप्रा की 3500 किलोमीटर की यात्रा 3500 किलोमीटर की यात्रा पर निकली शिप्रा,नदी स्वच्छता की जगाएगी अलख

जहां एक ओर तकनीकी युग में भाग-दौड़ भरी जिंदगी में इंटरनेट, सोशल मीडिया और अपने करियर को सवारने में युवा पीढ़ी मशगूल है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सरोकारों को नजरअंदाज करने वाली इसी पीढ़ी की एक बेटी है शिप्रा पाठक है जिसने अपने कदमों से मिसाल बनाने के लिए हैरान करने वाला कदम उठाया है। आपको बता दें कि शिप्रा नदी जल स्वच्छता की अलख जगाने के लिए नर्मदा की 3500 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकली हैं। खबर के मुताबिक शिप्रा उत्तर प्रदेश के दातागंज से ताल्लुक रखती हैं।

शिप्रा की 3500 किलोमीटर की यात्रा 3500 किलोमीटर की यात्रा पर निकली शिप्रा,नदी स्वच्छता की जगाएगी अलख

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गौरतलब है कि शिप्रा की ये यात्रा चार राज्यों के 100 से अधिक शहरों, जिलों का पड़ाव पार कर फरवरी में महाराष्ट्र के ओंकारेश्वर के उस स्थान पर पूरी होगी, जहां से उन्होंने अपनी यह यात्रा प्रारंभ की थी। दातागंज निवासी डॉ. शैलेष पाठक की पुत्री शिप्रा पेशे से इवेंट मैनेजर हैं। काम के सिलसिले में अपने शहर से ज्यादा बेंगलुरू में रहना होता है। देश-विदेश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम के लिए जाना पड़ता है। इस व्यस्तता के बाद भी शिप्र ने अपनी धार्मिक और अध्यात्मिक आस्था की ज्योति मद्धिम नहीं पढऩे दी।

दरअसल शिप्रा ने एक धार्मिक पुस्तक के अध्ययन के दौरान ही नर्मदा परिक्रमा के बारे में पढ़ा। बस, वहीं से नर्मदा नदी की पैदल परिक्रमा का संकल्प लिया। यात्रा ओंकारेश्वर से शुरू कर चार राज्यों के समस्त प्रवाह क्षेत्र को पूरा कर इसी स्थान पर संपन्न होनी थी। परिवार के लोगों को बेटी के अकेले इतने कठिन सफर पर निकलने पर कुछ आशंकाएं जरूर थीं लेकिन शिप्रा ने उन्हें समझाया। और परिवारी जनों ने भी बाद में उनको सहर्ष स्वीकृति दे दी।

गौरतलब है कि एक नवंबर को ओंकारेश्वर में पूजन के साथ शिप्रा ने यात्रा शुरू की। 25 दिसंबर मंगलवार तक के 55 दिनों में वह 1700 किलोमीटर का सफर पूरा कर जबलपुर पहुंची थीं। शिप्रा प्रतिदिन 60 किलोमीटर तक चलती हैं। ठहरने को न कोई होटल, घर और न अन्य इंतजाम। मानसिक दृढ़ता के साथ शिप्रा के कदम आगे बढ़ते रहे। जंगल, बीहड़ से अकेले गुजरती हैं।

शिप्रा नदी किनारे , मंदिर, सराय में रात गुजारती हैं

शिप्रा ने वाहनों सहित दूसरे यातायात साधनों का त्याग किया है। वह रात नदी किनारे के नगर, कस्बे के मंदिर, सराय, धर्मशाला में बिताती हैं। वहीं पर भोजन कर अगली सुबह फिर निकल पड़ती हैं। सफर के दौरान फोन पर बातचीत में शिप्रा बताती है कि हिमालय से निकलने वाली यमुना और गंगा मैदानी क्षेत्र में काफी दूषित हैं। जबकि, चार राज्यों में प्रवाहित होने वाली नर्मदा का जल काफी निर्मल है। शिप्रा इस यात्रा को पूरा कर प्रदेश में गंगा, यमुना की स्वच्छता की अलख जगाएंगी। दरअसल शिप्रा ये यात्रा निस्वार्थ भाव से कर रहीं हैं। फोन पर हुए बात में उन्होंने कहा कि वह यात्रा अपने मन की संतुष्टि के लिए कर रही हैं ।

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