January 29, 2022 12:25 pm
यूपी

मुख्य सचिव से मिले परिषद नेता, कैशलेस चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था लागू करने की मांग

मुख्य सचिव से मिले परिषद नेता, कैशलेस चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था लागू करने की मांग

लखनऊ: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी और महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने प्रदेश के मुख्य सचिव आर. के. तिवारी से मुलाकात की। इस दौरान उन्‍होंने पिछले पांच वर्ष से लंबित पं. दीन दयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था लागू न होने पर दु:ख जताया।

राज्‍य कर्मचारी परिषद ने आज मुख्‍य सचिव से मुलाकात कर उन्‍हें कैशलेस चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था लागू न होने के कारण प्रदेश के कर्मचारियों को हो रही परेशानी से अवगत कराया और एक स्मरण पत्र भी दिया। साथ ही इस पत्र की एक कॉपी उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय भेजते हुए इस व्‍यवस्‍था को अविलंब लागू कराने की मांग की। वहीं, मुख्य सचिव ने प्रतिनिधि मंडल के सामने ही प्रमुख सचिव चिकित्सा स्‍वास्‍थ्‍य को इसे अविलंब लागू कराने के निर्देश दिए।

2013 में सरकार ने शपथ पत्र देकर दिया था आश्‍वासन  

परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने मुख्य सचिव को बताया कि, विभिन्न मांगों को लेकर परिषद के नेतृत्व में हुए आंदोलन के परिणाम स्वरूप 2013 में सरकार ने उच्च न्यायालय में शपथ पत्र देकर कर्मचारियों को कैशलेस योजना लागू करने का वायदा किया था। इस व्यवस्था को लागू कराने के लिए कई उच्च स्तरीय वार्ता हुई नियमावली बनीं। लगभग 3.5 लाख कार्ड भी बने।

उन्‍होंने बताया कि, बाद में इस योजना का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा रखा गया। लेकिन दुर्भाग्य यह कि पांच साल बीत जाने के बावजूद यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। परिषद द्वारा इस संबंध में मुख्य सचिव स्तर पर लगातार पत्राचार के बाद भी न तो वित्त विभाग ने इसका कोई हल निकाला न ही प्रस्तावित 75 करोड़ की धनराशि आवंटन किया गया। ऐसे में यह महत्वकांक्षी योजना वित्त विभाग की मनमानी का शिकार बनी हुई है।

राज्‍य कार्मिकों को हो रही परेशानी  

हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 16 अक्टूबर, 2018 को वार्ता के दौरान आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक उसका अनुपालन न होना बहुत दुखद है। जबकि कार्मिकों को धन रिम्वर्समेन्ट के माध्यम से काफी परेशान होकर और रास्ते के भ्रष्टाचारी तंत्र को पार करते हुए 3-4 वर्षों के बाद कुछ अंश प्राप्त हो ही जाता है। अंत: अतिरिक्त धन विभाग या सरकार को देने की आवश्यकता नहीं है, सिर्फ भ्रष्टाचार को समाप्त कर तत्कालिक बड़े इलाजों में सहायता देने की मंशा के तहत मोड ऑफ पेंमेन्ट का स्वरूप बदला गया है। ऐसा किया जाना कर्मचारियों के साथ सरकार के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा कि, केवल वित्त विभाग के कतिपय अधिकारियों के कारण इस महत्वाकांक्षी योजना की बलि नहीं चढ़नी चाहिए।

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