UP में डीजे बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब डीजे नहीं...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के डीजे संचालकों को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के डीजे पर बैन के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष न्‍यायालय ने हाईकोर्ट के डीजे बैन के फैसले पर रोक लगाते कहा कि, ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन हो।

लाइसेंस धारक बजा सकते हैं डीजे: SC

उच्‍चतम न्‍यायालय ने आज कहा कि, यूपी में डीजे सरकार की ओर से बनाए गए नियमों के अनुसार लाइसेंस लेकर ही बजाया जाए। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि, राज्‍य में डीजे कानूनी तरीके से वैध रूप से जारी किए गए लाइसेंस धारक ही बजा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विनीत सरन और दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने आज अपने आदेश में कहा कि, जिस याचिका पर हाईकोर्ट का आदेश जारी हुआ उसमें पूरे राज्य में डीजे बैन की मांग नहीं की गई थी, सिर्फ एक इलाके में शोर से राहत मांगी गई थी, हाईकोर्ट ने बिना प्रभावित पक्ष को सुने आदेश दिया।

2019 में प्रदेश में डीजे बैन

सुनवाई के दौरान आज उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वकील गरिमा प्रसाद ने कहा कि, 4 जनवरी 2018 को सरकार ने DJ और इंडस्ट्रियल एरिया में ध्वनि प्रदूषण को लेकर निर्देश जारी किया था। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, 2019 से राज्य में DJ नहीं बज रहा है और सरकार इसे बहुत अच्छे तरीके से पालन करा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक दर्जन से ज़्यादा डीजे संचालकों ने अर्ज़ी दाखिल की थी। डीजे संचालकों ने अपनी अर्ज़ी में हाईकोर्ट के आदेश को उनकी आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार का हनन बताया।

इस याचिका पर बैन किया गया था डीजे

दरअसल, इलाहाबाद में सुशील चंद्र श्रीवास्त ने याचिका दाखिल करते हुए हाशिमपुरा इलाके में कावड़ यात्रा के दौरान घर के पास लगाए गए एलसीडी का मामला उठाते हुआ कहा था कि सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक वह बजता है, जिससे उनकी 85 साल की मां को परेशानी होती है। इस पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त, 2019 में पूरे राज्य में डीजे बजाने पर पाबंदी लगा दी थी।

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