किशनपुर थानाध्‍यक्ष का अलग अंदाज, कुर्सी पर सालों तक रहने का गहरा है राज     

फतेहपुर: फतेहपुर जिले में एक ऐसे थानाध्यक्ष हैं, जो अपनी पुलिसिंग के दम पर कायम रहे। इस दौरान भले ही दो पुलिस अधीक्षक, कई पुलिस उपाधीक्षक और जिले भर के थानाध्यक्ष बदले हों, लेकिन उनकी कुर्सी पर बिल्कुल भी आंच नहीं आई।

हम बात कर रहे हैं खागा सर्किल के किशनपुर थानाध्यक्ष पंधारी सरोज की। उनकी उम्दा पुलिसिंग का ही नमूना था कि इतने फेरबदल के बाद भी उन पर कोई असर नहीं हुआ और वह अपनी कुर्सी पर करीब दो साल तक जमे रहे। हालांकि, रविवार को जिले से 12 उप निरीक्षकों और निरीक्षकों का स्थानांतरण गैर जनपद में हुआ है। इनमें से एक पंधारी सरोज भी हैं।

एसपी भी बदले, लेकिन किशनपुर थानाध्‍यक्ष नहीं

पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा के समय से किशनपुर थानाध्यक्ष की कुर्सी संभालने वाले पंधारी सरोज के समय में ही आइपीएस प्रशांत वर्मा का गैर जनपद स्थानांतरण हो गया। उनके बाद जिला पुलिस की कमान आइपीएस सतपाल आंतिल के हाथों में आई, लेकिन किशनपुर थानाध्यक्ष पंधारी सरोज ने अपने जबरदस्त पुलिसिंग के बल पर अपना सिक्का जमाए रखा।

आइपीएस प्रशांत वर्मा से लेकर आइपीएस सतपाल आंतिल ने सभी थाना प्रभारियों को इधर से उधर तो कर दिया, लेकिन पंधारी सरोज अपने पुलिसिंग के दम पर डटे रहे। देखते ही देखते फतेहपुर पुलिस अधीक्षक आइपीएस सतपाल आंतिल का तबादला भी गैर जनपद के लिए हो गया। हालांकि, पंधारी सरोज का सिक्का किशनपुर में कायम रहा।

बड़ा खुलासा नहीं, लेकिन थानेदारी बनी रही

जिले में दो पुलिस कप्तान भले ही बदल गए हों, लेकिन पंधारी सरोज ने एक भी ऐसा खुलासा नहीं किया जिसपर पुलिस अधीक्षक ने प्रेस वार्ता की हो। हां, विवादों में उनका नाम जरूर आता रहा है, इसके बाद भी उनकी कुर्सी जिंदाबाद थी। जबकि बड़े-बड़े खुलासे करने वाले थानेदारों को इधर से उधर कर दिया गया।

इनमें यूपी पुलिस के लिए ऐतिहासिक काम करने वाले असोथर थानाध्यक्ष रणजीत बहादुर सिंह भी शामिल हैं। उन्होंने सिर कटे शव मामले का बड़ा खुलासा किया था, जिसपर पुलिस अधीक्षक सतपाल आंतिल ने उनके नाम को डीजीपी सम्मान के लिए भेजा था। इसके बाद भी उनका हुसैनगंज के लिए ट्रांसफर हो गया था, जबकि किशनपुर थानाध्यक्ष पंधारी सरोज का बाल भी बांका नहीं हुआ।

उन पर नहीं था स्थानांतरण का असर

किशनपुर थाना खागा सर्किल में आता है। यहां के क्षेत्राधिकारी अंशुमान मिश्र का भी स्थानंतरण हुआ उनके स्थान पर गयादत्त तिवारी आए, लेकिन किशनपुर थानाध्यक्ष वहीं रहे। सर्किल के सभी थानों खागा, धाता, सुलतानपुर घोष, खखरेरू में प्रभारी निरीक्षकों को इधर से उधर किया गया, लेकिन किशनपुर थानाध्यक्ष अपनी पुलिसिंग से ट्रांसफर की हर लहर को काट रहे थे।

जबकि अन्य सर्किल के थानों असोथर, हथगाम, थरियांव, गाजीपुर, ललौली, चांदपुर, जाफरगंज, कोतवाली,  हुसैनगंज, औंग, बकेवर, बिंदकी, जहानाबाद, कल्याणपुर, मलवां में भी थानाध्यक्ष बदल गए और किशनपुर थानाध्यक्ष पर कोई असर नहीं हुआ।

19 थानों पर भारी रहे किशनपुर थानाध्‍यक्ष

पूरे घटनाक्रम को देखते हुए एक बात समझ में नहीं आई कि किशनपुर थानाध्यक्ष किसकी कृपा से कुर्सी पर जमे रहे। न तो कोई बड़ा खुलासा न बड़ी कार्रवाई और न ही कोई नया पुलिसिंग का प्रयोग। फिर भी जिले के 19 थानों पर किशनपुर थानाध्यक्ष भारी रहे। उनको लेकर जिले भर के पुलिसकर्मियों के बीच गुपचुप चर्चा भी होती रही है। फिर भी इन सबके बीच जिले के सभी प्रभारियों को किशनपुर थानाध्यक्ष एक अदृश्य प्रेरणा जरूर दे गए, जिसकी चर्चा काफी लंबे समय तक होती रहेगी।

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