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संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट का दावा विश्व में 6.5 करोड़ लोग बेघर

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वाशिंगटन। सयुंक्त राष्ट्र संघ से जुड़ी शरणार्थी मामलों की संस्था ने कहा है कि इस समय पूरी दुनिया में 6.5 करोड़ बेघर लोग शरण मांगने को मजबूर हैं। सयुंक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में शरणार्थियों की अनुमानित संख्या साल 2015 के मुक़ाबले तीन लाख ज़्यादा है। हालांकि, साल 2014-15 के आंकड़ों के मुकाबले ये आंकड़ा कम है। 2014 से 2015 में इस संख्या में पांच लाख की बढ़त थी।

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यूएन से जुड़ी शरणार्थी मामलों की संस्था के हाई कमिश्नर फिलिपो ग्रांडी ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज़ से ये अभी भी दिल दुखाने वाली असफलता है। उन्होंने कहा है कि ‘ऐसा लगता है कि ये दुनिया शांति कायम करने में असफल है। आप पुराने संघर्षों को देख रहे हैं और नए संघर्षों को पनपता देखेंगे। ये दोनों ही लोगों को बेघर बनाते हैं और लोगों का जबरन घर छोड़ने के लिए मजबूर होना उन युद्धों का प्रतीक है जो कभी खत्म नहीं होते।’

युगांडा- शरणार्थियों के लिए सबसे मुफ़ीद जगह
साल 2016 में दक्षिणी सूडान में हिंसा भड़कने के बाद कुछ तीन लाख चालीस हज़ार लोग पड़ोसी देश युगांडा में चले गए थे। ये किसी भी देश से बेघर होने वाले लोगों की संख्या से कहीं ज्यादा थी। युगांडा में शरणार्थियों को 36 घंटों के भीतर ज़मीन का एक छोटा टुकड़ा और खेती करने के लिए ज़रूरी सामान मिलता है। एक साल पहले बीडी गांव सामान्य जगह थी लेकिन, अब ये दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविरों में से एक है जो 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यहां 25 लाख लोग शरणार्थियों के रूप में रहते हैं।
सयुंक्त राष्ट्र को उम्मीद है कि रिकॉर्ड-तोड़ बढ़ती शरणार्थियों की संख्या समृद्ध देशों को एक बार फिर शरणार्थियों को स्वीकार करने और शांति कायम करने के उपाय के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करेगी। ग्रांडी कहती हैं, ‘मैं अफ्रीका, मध्य-पूर्व के कम समृद्ध देशों से लाखों शरणार्थियों को स्वीकार करने को कह सकती हूं अगर समृद्ध देश ऐसा करने से इनकार कर रहे हैं तो।’ दुनिया भर में 6.6 करोड़ लोगों में 2 करोड़ लोग शरणार्थी और 4 करोड़ लोग अपने दी देशों में बेघर हैं। वहीं, 28 लाख लोग शरण मांग रहे हैं।

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