बिंदास लेखिका वर्जिनिया को गूगल ने डूडल बना कर दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। वर्जिनिया वुल्फ को गुगल ने डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी।वर्जिनिया वुल्फ बीसवीं शताब्दी की महान लेखिका थीं। उनका जन्म 25 जनवरी 1882 में लंदन में हुआ था और बचपन से ही उन्हें साहित्य से बेहद लगाव था।दुनिया के टॉप महिला लेखकों के बीच उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी।

 

पश्चिम में लोकप्रिय वर्जिनिया दुनियाभर में अपनी लेखनी से सबको अपना दिवाना बना चुकी थीं।वर्जिनिया के बोल भी बिंदास थे।वो जो भी बेलती थीं खुलकर करती थी।उनके बनाए हुए कोट्स आज भी बहुत फेमस है।न्होंने इंग्लिश क्लासिक्स से लेकर विक्टोरियन लिटरेचर तक को पढ़ा और दुनिया भर में महिलाओं को लेखन और जीवन जीने के बिंदास सूत्र दिए।

उनके कुछ बेहतरीन कोट्स थे- लिखना सेक्स की तरह है।आप पहले इश्क की खातिर करते हैं, फिर दोस्तों के लिए करते हैं और फिर पैसों के लिए करने लगते हैं।महिला होने के नाते मेरा कोई देश नहीं है।एक महिला होने के नाते पूरी दुनिया मेरा देश है।कुछ लोग धर्मगुरुओं के पास जाते हैं।कुछ शायरी का दामन थामते हैं और मैं अपने दोस्तों के पास जाती हूं।

वर्जिनिया का पहली नॉवेल द वॉयज आउट 1915 में प्रकाशित हुआ था।उनके श्रेष्ठ उपन्यासों में ‘मिसेज डैलोवे (1925)’, ‘टू द लाइटहाउस (1927)’, ‘ऑरलैंडो (1928)’ खास तौर से पहचाने जाते हैं।उन्होंने ए रुम ऑफ वन्स ओन लिखा था, जिसमें उनका कहना था कि औरतों का फिक्शन लिखना हो तो औरतों के पास अपना पैसा और कमरा होना चाहिए।