चारधाम यात्रा की तैयारी में जुटा पर्यटन विभाग, हवाई यात्राओं का अता पता नहीं

देहरादून। आने वाली 18 अप्रैल की तारीख को देवभूमि की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज हो जाएगा। इसकी चाक-चौबंद तैयारियों को लेकर विभाग जुटा है। विभाग की माने तो लगभग सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आने वाली 18 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुल जाएंगे। इसके साथ ही 28 अप्रैल को केदारनाथ और 29 को बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे। ऐसे में प्रशासन पूरी तरह से अपनी तैयारियों को अन्तिम रूप देने में जुटा है। लेकिन चारधाम यात्रा के लिए हवाई सेवाओं को लेकर अभी तक सारी तैयारी अधर में ही अटकी हुई है। हांलाकि तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने चर्चा की है।

बता दें कि चारधाम यात्रा की तैयारियों की देखरेख कर रहे पर्यटन विभाग सहायक कार्यकारी अधिकारी ज्योति नीरज खैरवाल से जब हवाई सेवाओं के शुरू होने में हो रही देरी को लेकर सवाल पूछा गया तो कोई संतोष जनक उत्तर उनके पास नहीं था। उन्होने कहा कि इसको लेकर टैण्डर की प्रक्रिया है, जो इच्छुक कंपनियां थी उन्होने इसमें भाग लिया। रेट को लेकर जल्द ही उनके और विभाग के साथ प्रशासन के बीच बातचीत कर इससे पूरा किया जाएगा।

वहीं चारधाम यात्रा को लेकर जहां विभाग से लेकर प्रशासन तक चाक-चौबंद तैयारियों की बात कर रहा है। वहीं इस बावत यात्रियों की सहूलित के लिए चलाई जाने वाली हवाई सेवाओं के बारे में अभी तक प्रशासन और पर्यटन विभाग किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा है। बताया जा रहा है कि हर साल प्राइवेट सेक्टर को इस बावत टेण्डर दिया जाता है। बीते सालों में इस हवाई सेवाओं को प्रदान करने वाली की कंपनियां इस बार भी प्रयास में लगी हुई हैं। ​​​​

साथ ही सूबे में चारधाम यात्रा को लेकर हवाई सेवाओं के निर्णय में हो रही देरी को लेकर दबे स्वर में एक बड़े खेल की बू आती दिखाई दे रही है। सूत्रों की माने तो हर साल आवंटन में आने वाले ये कंपनियां बड़े महानगरों में अपना ऑफिस रखती है। इसके साथ ही ये कंपनियां इस बावत टिकटों की मानक से अधिक मूल्यों पर ब्लैक मार्केटिंग करती हैं।

देवभूमि आने वाले यात्रियों के लिए जहां हवाई सेवाओं के लिए टिकटों की किल्लत नजर आती है। वहीं देवभूमि से बाहर ही ये सारे टिकट वक्त के पहले ही बेच दिये जाते हैं। इसके बाद अगर किसी यात्री को टिकट चाहिए होता है तो ब्लैक में टिकट मिलता है। बताया जा रहा है कि इसमें पूरा विभाग और प्रशासन की मिलीभगत से विमानन सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां करती है।सूत्रों की माने तो इस बार भी इस खेल को खेलने में की बड़े लोग लगे हुए हैं। लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई निर्णय नहीं हो सकता है।

अब ये देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले 14 तारीख को इस खेल में कौन विजेता बनता है। क्या इस बार भी टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग होगी। क्या श्रद्धालुओं को हवाई सेवाओं के लिए तय मूल्य से अधिक का भुगतान करना होगा। ये कई बड़े सवाल है जिनका जबाव भी तक ना ही विभाग के पास है ना ही प्रशासन के पास।