नमक पर ब्रिटिश राज के एकाधिकार के खिलाफ निकाला गया था नमक सत्याग्रह आंदोलन

नई दिल्ली:अंग्रेजी हुकूमत से देश को मुक्ति दिलाने के लिए 1930 में चले नमक सत्याग्रह आंदोलन की धार को जिले में तेज किया गया था। सैकड़ों क्रांतिकारियों को जेल में डाला गया लेकिन वह अंग्रेजी शासकों के आगे झुके नहीं। इनमें बड़ी संख्या में जसराना और शिकोहाबाद तहसील के गांवों के क्रांतिकारी शामिल थे। जिले में शामिल दो तहसीलें शिकोहाबाद और जसराना आजादी के आंदोलन के दौरान मैनपुरी का हिस्सा थीं। इस क्षेत्र की गतिविधियां मैनपुरी जिले से जुड़ी रहती थीं। 1929 में बेबर में राजनीतिक कांफ्रेंस आयोजित हुई थी।

 

 

इसके बाद नवजवान भारत सभा का अधिवेशन विनायक सखाराम दाड़ेकर की अध्यक्षता में किया गया। 1929 में हुए इस अधिवेशन में सरदार भगत सिंह एवं चंद्रशेखर आजाद भेष बदल कर शामिल हुए थे। उन्होंने युवाओं में आजादी का जोश जगाने का काम किया। अधिवेशन के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण भी देश को आजाद कराने में कूद पड़े थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1930 में जब नमक सत्याग्रह शुरू किया तो इस आंदोलन की धार को वहां के लोगों ने काफी तेज कर दिया था। मास्टर मोतीलाल, शंभूदयाल, गनेश चंद्र कुशवाह, गोविंद वर्मा एवं भवानी सिंह के नेतृत्व में आंदोलन चला था।

 

सिरसागंज के अकबर सिंह, गुढ़ा निवासी अतराज सिंह, नूरपुर निवासी अनंतराम, उखरेंड निवासी अनोखेलाल चतुर्वेदी, शिकोहाबाद के अंबिका प्रसाद, आनंदी प्रसाद, जयंती प्रसाद, कन्हैयालाल, मक्खनपुर निवासी अमरनाथ, सिरसागंज के इंद्रजीत, नगला गुलाल के ऊदल सिंह, ग्याप्रसाद, दुगलपुर एका के उमराय सिंह, फतेहपुरा फरिहा के निवासी कोकाराम, सिकंदरपुर के निवासी ख्यालीराम सहित बड़ी संख्या में क्रांतिकारियों को नमक आंदोलन के चलते जेल में डाला गया था।

 

1930  में हुई थी आंदोलन की शुरूआत

 

नमक सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा चलाए गयए प्रमुख आंदोलनों में से एक था। 12 मार्च, 1930 को बापू ने अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था। उन्होंने यह मार्च नमक पर ब्रिटिश राज के एकाधिकार के खिलाफ निकाला था। अहिंसा के साथ शुरू हुआ यह मार्च ब्रिटिश राज के खिलाफ बगावत का बिगुल बन कर उभरा था। बता दें उस दौर में ब्रिटिश हुकूमत ने चाय, कपड़ा, यहां तक कि नमक जैसी चीजों पर अपना एकाधिकार स्थापित कर रखा था। उस समय भारतीयों को नमक बनाने का अधिकार नहीं था। हमारे पूर्वजों को इंगलैंड से आनेवाले नमक के लिए कई गुना ज्यादा पैसे देने होते थे। बापू के इस सत्याग्रह को दांडी मार्च के नाम से भी जाना जाता है।

 

पहले गांधी जी को नहीं मिला था सहयोगियों  का समर्थन

 

 

जब गांधीजी ने इस आंदोलन को लेकर सहयोगियों को अपनी योजना बताई, तो उनके घनिष्ठ और सहयोगी भी पूरी तरह असहमत थे। सभी का कहना था कि आखिर सत्याग्रह के लिए नमक ही क्यों? कई नेताओं का मानना था कि नमक का मुद्दा उतना महत्वपूर्ण नहीं है और इसकी वजह से अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे पूर्ण स्वराज से लोगों का ध्यान भटक जायेगा। लेकिन, उनकी आशंकाएं तब समाप्त हो गई, जब आमलोगों द्वारा जगह-जगह दांडी मार्च का स्वागत किया गया। नमक गांधीजी के लिए बड़ा प्रतीक सिद्ध हुआ था। चूंकि नमक मानव के भोजन का महत्वपूर्ण और आधारभूत हिस्सा है, अतः नमक कर के मुद्दे को उठा कर गांधी जी ने हुकूमत की निर्दयता को उजागर कर दिया था।

 

 

दांडी मार्च करनेवाले लोगों के हाथ में एक भी तख्ती या झंडा तक नहीं था। यह मार्च लोगों को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम बना था। गांधीजी की इस यात्रा को प्रेस का भी बड़ा कवरेज मिला, जिसने पूरे देश में आजादी की लहर उठा दी थी। इस सत्याग्रह ने अंगरेजी सरकार को हिला कर रख दिया था और दुनिया में उत्सुकता जगा दी थी। गांधीजी के बाद पूरे देश में लोगों ने नमक बनाना शुरू कर दिया। इस दौरान गांधीजी को गिरफ्तार भी किया गया था। गांधीजी की गिरफ्तारी ने लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया। इसके बाद आनेवाले महीनों में जम कर गिरफ्तारी की गई।

 

नमक आंदोलन ने पूरे देश को किया था एकजुट

भारतीय समुद्री तटों पर नमक आसानी से बनाया जा सकता था, लेकिन किसी भी भारतीय को नमक बनाने की इजाजत नहीं थी। इस मुद्दे ने पूरे देश में जाति, राज्य, नस्ल और भाषा की सभी दीवारें तोड़ दीं थीं। यह उन भारतीय महिलाओं के लिए भी एक शक्तिशाली मुद्दा था, जो अपने परिवार का पेट भरने के लिए संघर्ष कर रही थी। गांधीजी के नेतृत्व में 240 मील लंबी यात्रा दांडी स्थित समुद्र किनारे पहुंची, जहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से नमक बना कर नमक कानून तोड़ा था- इस दौरान उन्होंने समुद्र किनारे से खिली धूप के बीच प्राकृतिक नमक उठा कर उसका क्रिस्टलीकरण कर नमक बनाया था। उनके साथ 79 अनुयायियों ने भी यात्रा की थी, जिनकी प्रगति देख कर भारतीयों ने अरब सागर के तट पर दांडी तक के रास्ते में उनका पूरा उत्साहवर्धन किया।

 

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By: Ritu Raj