पैनिक अटैक से बचने के है प्राकृतिक उपाय

नई दिल्ली। पैनिक अटैक आज के समय में काफी आम हो चुका है। आए दिन लोग इस समस्या के शिकार हो रहे है। इस बीमारी में लोगों को अचानाक से डर और घबराहट होनी शुरु हो जाती है। या फिर छाती के भारी होने के साथ सांस लेने में तकलीफ होती हैं ये सभी चीजे पैनिक अटैक के दायरे में आती है। असल में छोटी-छोटी सांसें आना, बेचैनी, घबराहट, हाथ-पैर में कंपन या खुद के संतुलन खोने के एहसास को ‘पैनिक अटैक’ कहते हैं।

दिमाग में बहुत ज्यादा प्रेशर होने और डर होने की वजह से पैनिक अटैक की शिकायत होती है। पैनिक अटैक हमारी दिनचर्या, पढ़ाई, करियर, परिवार और रिश्तों को भी प्रभावित करने लगता है। जिसकी वजह से जिदंगी में बहुत से उतार चढ़ाव आते हैं।

पहचाने लक्षण
अगर आप बार बार इस तरह की परेशानी का शिकार हो रहे हैं तो आपको पहले इसके लक्षण जानना जरुरी है। आइये आपको बताते है इसके लक्षण क्या क्या है। तेज बुखार होना, बेमतलब की परेशानी होना, पसीने पसीने हो जाना, चक्कर आना ये सभी इस बीमारी के लक्षण है।

पैनिक अटैक के समय क्या करे
जब कभी आप पैनिक अटैक का शिकार हो तो उस समय आप तुरंत एक शांत जगह पर चले जाएं। फिर वहां सीधे लेट कर कुछ मिनटों के लिए हल्के से आंखों को बंद करे। इसके बाद धीरे-धीरे दिमाग से विचारों को निकाले। बंद आंखों वाले इस व्यायाम के जरिए आप इसके लक्षणों से जल्द से जल्द आराम पा सकते हैं।

गहरी सांस का अभ्यास
जब भी आप पैनिक अटैक का शिकार होते है तो उस समय सांसे तेज चलने लगती है जिसकी वजह से सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसलिए आपको 5-10 मिनट तक गहरी सांस लेनी चाहिए।

विचारों को करें धीमा
दिमाग में एक ही समय में अनेकों विचारों पर विचार करना नकारात्मक विचार आना पैनिक अटैक का सबसे बड़ा कारण है।

केंद्रीय बिंदु पर व्यायाम
पैनिक अटैक के एक प्रकरण के दौरान एक व्यक्ति के विचार तेज़ी से नकारात्मक और निरंतर होते चले जाते हैं, जिससे डर और चिंता बनी रहती है। ऐसे में किसी और काम की ओर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें, जब तक कि आपके दिमाग में तेजी से चल रहे विचार और बढ़ती सांसे सामान्य न हो जाए। इस अभ्यास के जरिए पैनिक अटैक बहुत हद तक कम किए जा सकते हैं।अगर आप या आपके परिवार में कोई पैनिक अटैक का शिकार होता है तो आप इस तरह से उन्हें बचा सकते हो।