1601132769223 kfjscy5k इस चूहे ने बचाई है हजारों लोगों की जान, अब हो रहा 'रिटायर'

स्निफर डॉग यानी सूंघने वाले कुत्ते के बारे में तो आप खूब सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी स्निफर रैट यानी सूंघने वाले चूहे का जिक्र सुना है। नहीं तो हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही एक चूहे के बारे में आइए जानते हैं कौन है वो चूहा और हम उसका जिक्र क्यों कर रहे हैं।

कौन है स्निफर रैट

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मगावा, इस नाम से आप शायद वाकिफ नहीं होंगे, लेकिन कंबोडिया का बच्चा-बच्चा इस नाम से वाकिफ है। आखिर मगावा ने काम ही ऐसा किया है। वो कंबोडिया के लोगों के लिए किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं है। मगावा एक स्निफर रैट है यानी सूंघने वाला चूहा। मगावा नाम का एक चूहा जो अपनी बहादुरी के तमाम किस्सों के लिए याद किया जाएगा वो अब पांच साल की सर्विस के बाद रिटायर होने जा रहा है।

विस्फोटकों को सूंघने में माहिर है मगावा

पांच साल में उसने 2 लाख 25 हजार स्क्वॉयर मीटर में काम करके हजारों लोगों की जान बचाई। ये 42 फुटबॉल मैदानों के बराबर है और इसी खासियत के चलते ये बेहत पॉपुलर है।

लैंडमाइंस और जिंदा विस्फोटकों का भी लगा चुका पता

मगावा अभी तक करीब  71 लैंडमाइन्स और  38 जिंदा विस्फोटकों का भी पता लगा चुका है,  मगावा के हैंडलर का कहना है, ‘मगावा का प्रदर्शन नाबाद रहा है, मुझे उसके साथ काम करने में बहुत गर्व महसूस होता है क्‍योंकि इतना छोटा होने के बाद भी उसने कई लोगों की जान बचाने में मदद की है। हैंडलर का कहना है कि मगावा अब थक गया है, हालांकि, वो अब भी काफी फिट है लेकिन उम्र का असर दिखने लगा है, अब वो अपने पसंदीदा खाने को खाने के लिए आजाद है और वो सब कुछ कर सकता है जो वो करना चाहता है।

मगावा को किया जा चुका है सम्मानित

मागाबा को 2016 में जब कम्बोडिया लाया गया तो वह महज 2 साल का था अब अपनी शानदार सेवाओं के बाद उसे रिटायरमेंट दिया जा रहा है। मागावा को जहां लैंडमाइन का विस्फोटक का शक होता, वहां वो रुक जाता है फिर जमीन को खुरचने लगता। इसके बाद वहां से हट जाता और स्टाफ लैंडमाइन क्लियर कर देता। मगावा को उसके काम के लिए ब्रिटिश चैरिटी द्वारा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। यहां आने से पहले उसका इस्तेमाल तंजानिया की कैमिकल फैक्ट्री में भी किया गया था। पिछले साल उसे रोडेन्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

कम्बोडिया में गृहयुद्ध के दौरान बारूदी सुरंगे बिछाई गईं थीं

गौर हो कि कम्बोडिया में गृहयुद्ध के दौरान जंगलों में हजारों की संख्या में बारूदी सुरंगे बिछाई गईं थी। अकसर, यहां के गुजरने वाले लोगों के पैर इनपर पड़ जाते। दबाव जैसे ही पड़ता था ये लैंड माइन्स फट जातीं थीं यानी इनमें ब्लास्ट हो जाता था। इसे लेकर वहां की सरकार खासी फिक्रमंद थी। मगावा को एक एनजीओ एपीओपीओ ने लैंड माइंस खोजने के लिए प्रशिक्षित किया है। इसकी ट्रेनिंग इतनी खास है कि इसे दुनिया का सबसे सफल Rodents माना जाता है।

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