November 28, 2021 4:46 am
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धुंधली पड़ती ताज की चमक को वापस लाने के लिए किया जा रहा है मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल

Taj Mahal ili 53 img 1 धुंधली पड़ती ताज की चमक को वापस लाने के लिए किया जा रहा है मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित शाहजहां और मुमताज के प्यान कि निशानी और विश्व के सात अजूबों में से एक ताजमहल की चमक समय के साथ फीकी पढ़ गई है। 1680 में 240 फीट ऊंची और 17 एकड़ में फैली इस मुगलकालीन इमारत के संगमरमर का सफेद रंग पीला पड़ता जा रहा है। हालांकि, इसकी चमक को बरबरार रखने के लिए कई काम भी किए जा रहे हैं, उन्ही में से एक है मुल्तानी मिट्टी का लेप। ताजमहल की चमक को बरकरार रखने के लिए उस पर मुल्तानी मिट्टी से पॉलिश की जा रहा है। साल 2015 में ताजमहल की खुबसूरती को बनाए रखने के लिए ये काम शुरू किया गया था, जिसमें से 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है।

Taj Mahal ili 53 img 1 धुंधली पड़ती ताज की चमक को वापस लाने के लिए किया जा रहा है मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल

इस काम के अगले साल नवंबर 2018 तक पूरी तरह से खत्म होने की उम्मीद बताई जा रही है। आपको बता दें कि आईआईटी कानपुर और अमेरिकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के मुताबिक संगमरमर पर डीजल और जले हुए कचरे का धुआं आकर बैठने के कारण ताजमहल धीरे-धीरे अपनी सफेदी खोता जा रहा है।  वहीं आगरा के इंडस्ट्रियल जोन बनने के कारण बढ़ रहे प्रदूषण का असर भी ताजमहल पर साफतौर पर दिखाई दे रहा है। ताज की मीनारों और गुबंद पर पीले धुएं की परतें जम गई थीं।

इसे पीले रंग को चिकनाई और कार्बन सोख लेता है इसलिए ताजमहल पर मुल्तानी मिट्टी का लेप चढ़ाया जा रहा है, जिसे मड-पैक थेरेपी कहते हैं। मड-पैक थेरेपी के तहत पीली पड़ी किसी इमारत को वापस से चमकाने के लिए उसके ऊपर मुल्तानी मिट्टी की पतली परत बिछाई जाती है। बाद में इस परस पर प्लास्टिक शीट्स चढ़ा दी जाती है। मिट्टी की ये परत संगमरमर पर जमी ग्रीस और कार्बन को सोख लेती है। इसी के साथ जब मिट्टी पूरी तरह से सूख जाती है तो इसे डिस्टिल वॉटर से साफ किया जाता है। पुरानी इमारतों को साफ करने का ये अबतक का सबसे अच्छा तरीका है।

 

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