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कल्याण सिंह के शासन में नकल माफियाओं की रूह कांपती थी

कल्याण सिंह के शासन में नकल

Brij Nandan
लखनऊ। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के शासन में अपराधियों और नकल माफियाओं की रूह कांपती थी। ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने का काम किया। वह अध्यापक थे। इसलिए शिक्षा विभाग की खामियों से वह वाकिफ थे। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद से ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की कवायद शुरू कर दी थी। अपने पहले ही कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं में नकल को बंद करा दिया। परीक्षा में नकल रोकने के लिए उसे संज्ञेय अपराध घोषित किया गया। उनके कार्यकाल में अपराधियों और नकलचियों की रूह कांपती थी। वर्ष 1992 में, उनकी सरकार द्वारा एंटी-कॉपींग एक्ट लागू किया गया, जो पहली बार देश में लागू किया गया।

उनके इस कदम की शिक्षाविदों के साथ ही आम लोगों ने भी काफी सराहना की थी। उन्होंने शिक्षकों पर लगाम कसने के लिए उस समय से शिक्षामंत्री सूर्य प्रताप शादी को खास निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि उस समय शिक्षा मंत्री परिषदीय विद्यालयों में तूफानी दौरे करते थे और शिक्षक अपने तय समय पर स्कूल पहुंचने लगे थे और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ था। जब भी वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में नकल कराना बंद करवा दिया था। कल्याण सिंह ने स्कूलों में भारत माता की प्रार्थना और वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया था। उनका मानना था कि शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी है। वह बच्चों में भारतीयता का बोध कराना चाहते थे।

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