13 अप्रैल से शुरू हो रहा नवसंवत्सर, ये बातें जान लें नहीं तो उठाना पड़ेगा नुकसान!

लखनऊ: चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा में नववर्ष की शुरुआत होती है। इसी दिन नवरात्रि की भी शुरूआत होती। इस साल भी चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा में नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इसके साथ ही नव विक्रम संवत यानि हिंदुओं का नया साल प्रारंभ हो रहा है।

13 अप्रैल से शुरू हो रहा नवसंवत्सर, ये बातें जान लें नहीं तो उठाना पड़ेगा नुकसान!

दरअसल इस बार चैत्र माह का प्रारंभ अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 29 मार्च 2021 को प्रारंभ हो गया है। माह की शुरुआत तो कृष्ण पक्ष एक से ही 29 मार्च को प्रारंभ हो गई।

लेकिन प्रतिपदा से नववर्ष प्रारंभ होने के कारण 13 अप्रैल 2021 से बड़ी नवरात्रि प्रारंभ होगी और इसी दिन गुड़ी पड़वा भी है। तभी से विक्रम संवत 2078 भी प्रारंभ हो जाएगा। इसे संवत्सर कहते हैं जिसका अर्थ है ऐसा विशेषकर जिसमें बारह माह होते हैं।

नव संवत्सर के बारे में ये नहीं जानते आप

नव संवत्सर के बारे में कई लोग नहीं जानते होंगे। नया साल लगने पर नया संवत्सर भी प्रारंभ होता है। जैसे बारह माह होते हैं उसी तरह 60 संवत्सर होते हैं।

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संवत्सर अर्थात बारह महीने का कालविशेष। सूर्यसिद्धान्त अनुसार संवत्सर बृहस्पति ग्रह के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। 60 संवत्सरों में 20-20-20 के तीन हिस्से हैं जिनको ब्रह्माविंशति (1-20), विष्णुविंशति (21-40) और शिवविंशति (41-60) कहते हैं।

होते हैं कुल 60 संवत्सर

दरअसल संवत्सर को ही साल कहते हैं, हर साल का अपना एक अलग नाम होता है। कुल 60 वर्ष होते हैं तो एक चक्र पूरा हो जाता है। वर्तमान में प्रमादी नामक संवत्सर प्रारंभ हुआ है।

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इनके नाम इस प्रकार हैं- प्रभव, विभव, शुक्ल, प्रमोद, प्रजापति, अंगिरा, श्रीमुख, भाव, युवा, धाता, ईश्वर, बहुधान्य, प्रमाथी, विक्रम, वृषप्रजा, चित्रभानु, सुभानु, तारण, पार्थिव, अव्यय, सर्वजीत, सर्वधारी, विरोधी, विकृति, खर, नंदन, विजय, जय, मन्मथ, दुर्मुख, हेमलम्बी, विलम्बी, विकारी, शार्वरी, प्लव, शुभकृत, शोभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव, प्ल्वंग, कीलक, सौम्य, साधारण, विरोधकृत, परिधावी, प्रमादी, आनंद, राक्षस, नल, पिंगल, काल, सिद्धार्थ, रौद्रि, दुर्मति, दुन्दुभी, रूधिरोद्गारी, रक्ताक्षी, क्रोधन और अक्षय।

आनंद संवत्सर से खत्म होगा संकटकाल

13 अप्रैल को विक्रम संवत 2078 से आनन्द नाम का संवत्सर प्रारंभ होगा। जैसा कि नाम से ही विदित है कि इस संवत्सर में जनता में आनन्द की प्राप्ति होगी।

इसके मतलब यह कि अप्रैल से महामारी का प्रकोप भी समाप्त होगा और फिर से आनंद करने के बेखौफ घूमने-फिरने के दिन लौट आएंगे। इस संवत्सर का स्वामी भग देवता और इस संवत्सर के आने पर विश्व में जनता में सर्वत्र सुख व आनन्द रहता है।

मंगल नहीं कर पाएंगे ‘दंगल’

लेकिन इस बार मंगलवार से शुरू हो रही प्रतिपदा के कारण इस संवत या साल का राजा क्रूर ग्रह मंगल होगा। मंगल दंगल भी कराता है और लोककल्याणकारी भी होता है।

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इस साल या संवत की ग्रह परिषद में छह पद क्रूर ग्रहों के पास हैं और चार पद सौम्य ग्रहों को प्राप्त हुए हैं। महाक्रूर शनि के कोई पद नहीं है परंतु पूरे वर्ष वह मकर राशि में रहेंगे।

मीन राशि जातकों को मिलेगा ‘नया चंद्रमा’

दरअसल नया विक्रम संवत कर सुबह छह बजकर दो मिनट पर वृषभ लग्न में प्रवेश करेगा और चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल, 2021 का शुभारंभ रेवती नक्षत्र में मंगलवार को रेवती नक्षत्र में शुरू होगी।

13 अप्रैल से शुरू हो रहा नवसंवत्सर, ये बातें जान लें नहीं तो उठाना पड़ेगा नुकसान!

इस बार, अमावस्या और नव संवत्सर के दिन, सूर्य और चंद्रमा मीन राशि में ठीक एक ही अंश पर हैं अर्थात् मीन राशि में नया चंद्रमा उदय होगा।

वृषभ राशि में मंगल और राहु दोनों ही विद्यामान हैं। राजा, मन्त्री और वर्षा का अधिकार मंगल ग्रह के पास है। विक्रम संवत 2078 में मंगल ग्रह राजा व मंत्री का पद मिला है तथा वित्त का गुरु ग्रह को मिला है।

आंधी-तूफान का रहेगा जोर

असल में मंगल ग्रह को लड़वाने वाला यानि युद्ध का देवता कहा जाता जाता है। यह हिंसा, दुर्घटना, भूकंप,  विनाश, शक्ति, सशस्त्र बलों, सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, अग्निशमन, शल्य चिकित्सा, कसाई, छिपकर हत्या करने वाला, दुर्घटना, अपहरण, बलात्कार, उपद्रव, सामाजिक और राजैनतिक अस्थिरता के कारक ग्रह हैं।

विक्रम संवत 2078 के राजा मंगल होने से इस साल आंधी-तूफान का भी जोर रहेगा। मतलब लोग महामारी से मुक्त होंगे परंतु उपद्रव और प्राकृतिक घटनाओं से परेशान रहेंगे।

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